Thalapathy Vijay vs Rajinikanth & Kamal Haasan: जानें थलापति विजय की बड़ी जीत के वो 5 कारण, जिन्होंने उन्हें राजनीति में रजनीकांत और कमल हासन से आगे खड़ा कर दिया।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में नया रिकॉर्ड बना दिया है। विजय की पार्टी ने सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके अपने क्षेत्र कोलाथुर में करारी शिकस्त दी। 1967 के बाद यह पहली बार है जब दो द्रविड़ दलों (DMK और AIADMK) के अलावा किसी तीसरी पार्टी ने इतनी बड़ी जीत हासिल की है।
अभिनय से संन्यास: विजय का 'क्लियर मैसेज'
विजय की जीत का सबसे बड़ा कारण उनकी स्पष्टता रही। उन्होंने राजनीति में आने से पहले ही ऐलान कर दिया कि वह अपने 30 साल के फिल्मी करियर और 27 फिल्मों को छोड़कर पूरी तरह राजनीति में सक्रिय होंगे। इस फैसले ने जनता को यह विश्वास दिलाया कि विजय राजनीति में 'टाइम पास' के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए आ रहे हैं। इसके विपरीत, रजनीकांत इस बात को लेकर कभी स्पष्ट नहीं थे कि वे फिल्मों और राजनीति में किसे तवज्जो देंगे।
गठबंधन से इनकार और भ्रष्टाचार विरोधी रुख
विजय ने चुनावी मैदान में उतरते ही एक 'मास्टरस्ट्रोक' खेला। उन्होंने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही बड़ी द्रविड़ पार्टियों से गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया। इस फैसले से उन्हें खुद को एक 'स्वच्छ विकल्प' और भ्रष्टाचार विरोधी नेता के रूप में पेश करने में मदद मिली। इससे शहरी और युवा मतदाताओं के बीच उनकी एक अलग पहचान बनी, जबकि कमल हासन और रजनीकांत ने इन दलों पर सीधा हमला करने से परहेज किया था।
रजनीकांत और कमल हासन की चूक
रजनीकांत लंबे समय तक राजनीति में आने की अटकलों के बाद चुनाव लड़े बिना ही पीछे हट गए, जिससे मतदाताओं ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, कमल हासन की पार्टी 'मक्कल नीधि मय्यम' (MNM) केवल शहरी केंद्रों तक ही सीमित रह गई और 2019 व 2021 के चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। विजय ने इन गलतियों से सीखा और अपनी रैलियों को सिर्फ भीड़ तक सीमित न रखकर वोटों में तब्दील करने में सफलता पाई।
उम्र और युवाओं (Gen Z) का जबरदस्त समर्थन
विजय की उम्र भी उनके पक्ष में रही। जब रजनीकांत और कमल हासन ने राजनीति शुरू की, तब उनकी उम्र 65-70 के पार थी। इसके उलट, 51 वर्षीय विजय को युवा और 'Gen Z' नेता के रूप में देखा गया। तमिलनाडु में 40 वर्ष से कम आयु के लगभग 2 करोड़ मतदाता हैं। युवाओं के बीच विजय की लोकप्रियता और उनके सोशल मीडिया पर सक्रिय फैंस ने उनकी जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।
Published at : 05 May 2026, 07:21 am (IST)
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