डोलाट कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कपड़ा उद्योग अब सुधार के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं कम होने, मांग में स्थिरता आने और ब्रिटेन, यूरोपीय संघ व ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेक्टर का सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट चुका है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya samachar
भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ब्रोकरेज फर्म Dolat Capital की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं में कमी और वैश्विक मांग में सुधार के कारण भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर में नए उत्साह का माहौल बन रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योग अब उस दौर से बाहर निकल चुका है, जब ऊंचे शुल्क और कमजोर मांग के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि "सबसे बुरा दौर बीत चुका है" और अब क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
50% से घटकर 10% हुआ अमेरिकी टैरिफ
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 के अंत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारतीय कपड़ा उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद सामान्य होकर 10 प्रतिशत पर आ गया।
दंडात्मक और पारस्परिक शुल्कों में कमी से भारतीय वस्त्र निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। इससे अमेरिका जैसे बड़े बाजार में व्यापार सामान्य होने लगा है और रुकी हुई मांग फिर से लौट रही है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले भारतीय वस्त्रों पर कुल शुल्क 65-69 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जिससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई थी। अब शुल्क कम होने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में फिर से मजबूत स्थिति में आ गए हैं।
इसके साथ ही वैश्विक खरीदार अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने पर जोर दे रहे हैं। बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के प्रयासों के बीच भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक सोर्सिंग हब के रूप में उभर रहा है।
FTA से मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख बाजारों के साथ हालिया और प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय कपड़ा उद्योग को संरचनात्मक मजबूती प्रदान करेंगे।
इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को शुल्क संबंधी लाभ मिलने की संभावना है, जिससे निर्यात और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों बढ़ेंगे।
यार्न और स्पिनिंग सेक्टर में सुधार
डोलाट कैपिटल ने बताया कि उद्योग के मूलभूत संकेतकों में भी सुधार देखने को मिला है।
स्पिनिंग सेक्टर में क्षमता का बेहतर उपयोग
कपास की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार
यार्न स्प्रेड में मजबूती
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यार्न की मांग में वृद्धि
इन कारणों से पूरी मूल्य श्रृंखला में लाभप्रदता बेहतर हुई है।
अमेरिकी बाजार में मांग बनी मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद अमेरिकी बाजार में भारतीय कपड़ा उत्पादों की मांग स्थिर बनी हुई है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही की शुरुआत में मांग में मजबूती देखी गई है, जो उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
चुनौतियां अभी भी मौजूद
हालांकि रिपोर्ट ने भविष्य को लेकर आशावाद जताया है, लेकिन कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है:
अमेरिकी टैरिफ नीति में संभावित बदलाव
कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव
वैश्विक क्षमता विस्तार में देरी
अमेरिकी खुदरा मांग में कमजोरी
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
डोलाट कैपिटल की रिपोर्ट भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। अमेरिकी टैरिफ में राहत, मजबूत वैश्विक मांग, नए मुक्त व्यापार समझौते और उद्योग की बेहतर वित्तीय स्थिति के कारण टेक्सटाइल सेक्टर फिर से विकास की राह पर लौटता दिखाई दे रहा है। यदि मौजूदा परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
Published at : 11 Jun 2026, 08:57 am (IST)
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