गैंग दिन के समय ही चोरी को अंजाम देती थी। खासतौर पर बंद फ्लैटों को निशाना बनाया जाता था। फ्लैट के बाहर पड़ा अखबार, दरवाजे पर जमी धूल और लंबे समय से बंद मकान इनकी पहचान का मुख्य आधार होता था। गैंग का एक सदस्य नीचे निगरानी करता था और किसी के आने की भनक लगते ही व्हाट्सऐप कॉल के जरिए साथी को अलर्ट किया जाता था। इसके बाद लोहे की रॉड से ताले तोड़कर घरफोड़ चोरी की जाती थी।
Updated at : 26 Jan 2026 12:54 AM (IST)
Published at : 26 Jan 2026 12:54 AM (IST)
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