सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पत्नी की शिकायत में यह उल्लेख है कि उसने दहेज दिया था, तो केवल इसी आधार पर उसके या उसके परिवार के खिलाफ दहेज देने का आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि केवल शिकायत में दहेज देने की बात स्वीकार करने मात्र से किसी व्यक्ति या उसके परिवार के खिलाफ दहेज देने के अपराध में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एक पति द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। पति ने मांग की थी कि पत्नी द्वारा दायर शिकायत में दहेज देने की बात स्वीकार किए जाने के आधार पर उसके परिवार के खिलाफ दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 के तहत अलग से FIR दर्ज की जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल शिकायत या बयान में दहेज देने का उल्लेख अपने आप में अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि दहेज निषेध अधिनियम की धारा 7(3) का उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को सुरक्षित वातावरण देना है, ताकि वह बिना डर के शिकायत दर्ज करा सके। यदि हर शिकायत में दिए गए कथनों के आधार पर ही दहेज देने वालों पर मुकदमा दर्ज होने लगे, तो पीड़ित पक्ष शिकायत करने से हिचकिचा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि दहेज देने के आरोप को साबित करने के लिए स्वतंत्र, ठोस और अलग सबूत मौजूद हों—जो केवल शिकायत या बयान पर आधारित न हों—तभी दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 के तहत कार्रवाई संभव होगी।
कानून का संदर्भ
दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 मूल रूप से दहेज देने और लेने दोनों को अपराध मानती है, लेकिन समय के साथ इसमें संशोधन किए गए हैं। 1982 की संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों के बाद इस कानून में बदलाव कर इसे अधिक संतुलित और व्यावहारिक बनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दहेज कानूनों की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करता है। यह स्पष्ट करता है कि केवल स्वीकारोक्ति या बयान के आधार पर आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए मजबूत और स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक हैं।
Published at : 18 Apr 2026, 12:10 pm (IST)
Tags : Breaking News / NEWS UPDATE / #india news / #nationalnews / #court, Supreme court / #news today / #SupremeCourt #DowryLaw #LegalNews #IndianJudiciary #CourtVerdict #BreakingNews #IndiaLaw #DowryCase
5 PHOTOS
7 PHOTOS
5 PHOTOS