माहे श्रेणी का यह दूसरा एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
By : Admin User | Updated at : 22 Jul 2026, 05:27 pm (IST)
भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता को और मजबूत करते हुए एक और स्वदेशी युद्धपोत INS Malvan को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर आयोजित एक विशेष समारोह में इस अत्याधुनिक युद्धपोत का औपचारिक कमीशनिंग समारोह संपन्न हुआ। यह माहे श्रेणी (Mahe Class) का दूसरा एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है।
पुराने INS Malvan की विरासत को आगे बढ़ाएगा नया युद्धपोत
इस युद्धपोत का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व माइंसवीपर INS Malvan के सम्मान में रखा गया है। पुराना INS Malvan लगभग 19 वर्षों तक भारतीय नौसेना की सेवा में रहा और वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुआ था। नया युद्धपोत उसी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करेगा।
कारवार में हुआ भव्य कमीशनिंग समारोह
INS Malvan के नौसेना में शामिल होने के अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन, भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
'बाघ नख' है युद्धपोत का प्रतीक
INS Malvan के प्रतीक चिह्न में 'बाघ नख' को दर्शाया गया है। यह प्रतीक साहस, गति, रणनीतिक क्षमता और दुश्मन पर अचानक एवं सटीक हमला करने की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। प्रतीक के चारों ओर
समुद्री सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
यह अत्याधुनिक युद्धपोत विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। आधुनिक सेंसर, हथियार प्रणालियों और निगरानी तकनीक से लैस INS Malvan भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
INS Malvan के नौसेना में शामिल होने के साथ भारत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह युद्धपोत न केवल भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को भी और अधिक मजबूत करेगा।
Published at : 22 Jul 2026, 05:27 pm (IST)