यूरोपीय यूनियन (EU) ने रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के तहत भारत, चीन, UAE, तुर्किये, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान की 50 कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। EU का दावा है कि ये कंपनियां रूस को ऐसी तकनीक और उपकरण उपलब्ध करा रही थीं, जिनका उपयोग उसकी सैन्य गतिविधियों में हो रहा है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya samachar
यूक्रेन पर जारी रूसी हमलों के बीच यूरोपीय यूनियन (EU) ने रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए 21वें प्रतिबंध पैकेज का ऐलान किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इस नए प्रतिबंध पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करना और उसकी सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना है।
नए प्रतिबंधों के तहत भारत, चीन, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), किर्गिस्तान और कजाकिस्तान की करीब 50 कंपनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल सूची में शामिल किया गया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे रूस को ऐसी तकनीक, उपकरण और ड्यूल-यूज (सैन्य एवं नागरिक दोनों उपयोग) वस्तुएं उपलब्ध करा रही थीं, जिनका इस्तेमाल रूस अपनी रक्षा और सैन्य गतिविधियों में कर रहा है।

EU के अनुसार, प्रतिबंधों की नई सूची में ड्रोन निर्माण और उन्नत तकनीकी उपकरणों से जुड़ी 30 से अधिक कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों पर यूरोपीय देशों से तकनीक, मशीनरी और अन्य संवेदनशील उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाई जा सकती है।
बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र भी निशाने पर
यह प्रतिबंध केवल कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। यूरोपीय यूनियन ने रूस और उससे जुड़े देशों के लगभग 90 बैंकों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी और कुछ मामलों में संपत्तियां फ्रीज करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अलावा 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की योजना बनाई गई है ताकि रूस प्रतिबंधों से बचने के लिए वैकल्पिक वित्तीय माध्यमों का उपयोग न कर सके।
ऊर्जा क्षेत्र में भी EU ने रूस की तथाकथित "शैडो फ्लीट" पर कार्रवाई तेज कर दी है। यह वे जहाज हैं जिनका उपयोग रूस वैश्विक प्रतिबंधों से बचते हुए तेल निर्यात के लिए करता है। EU ने 30 नए जहाजों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया है और कई बंदरगाहों व हवाई अड्डों पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है।
भारत पर क्या होगा असर?
यूरोपीय यूनियन की एक्सपोर्ट कंट्रोल सूची में शामिल भारतीय कंपनियों को अब यूरोप से तकनीक, उपकरण और व्यापारिक सहयोग हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कुछ भारतीय कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है, हालांकि भारत और यूरोपीय यूनियन के व्यापक रणनीतिक संबंधों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
वैश्विक व्यापार पर बढ़ेगी चिंता
विश्लेषकों के अनुसार, EU के नए प्रतिबंध रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हैं, लेकिन इनका असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन और अन्य देशों की कंपनियों पर प्रतिबंधों से वैश्विक सप्लाई चेन, तकनीकी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबे खिंचने के बीच यह प्रतिबंध पैकेज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
Published at : 10 Jun 2026, 09:48 am (IST)
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