दोनों देशों के बीच पहले से स्वीकृत 36 वस्तुओं के आयात-निर्यात की अनुमति दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत की गई है।
By : Admin User | Updated at : 01 Aug 2026, 03:42 pm (IST)
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमावर्ती व्यापार को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। लंबे अंतराल के बाद सिक्किम के नाथू ला दर्रे और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमा पार व्यापार दोबारा शुरू हो गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान बंद हुई यह व्यवस्था अब फिर बहाल होने से सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
छह साल बाद फिर खुले व्यापारिक रास्ते
कोरोना महामारी और उसके बाद बने हालात के कारण भारत-चीन सीमा पर व्यापार कई वर्षों तक बंद रहा। अब दोनों देशों की सहमति के बाद 1 अगस्त से सीमापार व्यापार दोबारा शुरू कर दिया गया है। इसे व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ विश्वास बहाली की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नाथू ला से फिर चलेगा सिल्क रूट व्यापार
सिक्किम का नाथू ला दर्रा ऐतिहासिक सिल्क रूट का हिस्सा रहा है। इस मार्ग से सदियों तक दोनों देशों के बीच व्यापार होता रहा। अब एक बार फिर यह रास्ता खुलने से स्थानीय व्यापारियों और सीमावर्ती बाजारों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। तय व्यवस्था के अनुसार यह मार्ग हर साल सीमित अवधि तक व्यापार के लिए खुला रहेगा।
36 स्वीकृत वस्तुओं का होगा आयात-निर्यात
भारत और चीन के बीच पहले से निर्धारित 36 वस्तुओं की सूची के आधार पर व्यापार किया जाएगा। भारत की ओर से हस्तशिल्प, हैंडलूम उत्पाद, मसाले, सूखे खाद्य पदार्थ, कृषि उपकरण, रेडीमेड वस्त्र और धार्मिक उपयोग की सामग्री निर्यात की जाएगी। वहीं तिब्बत की ओर से ऊनी उत्पाद, याक से जुड़े सामान, बोरेक्स, जूते, कंबल और अन्य स्वीकृत वस्तुओं का आयात होगा।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं को किया गया मजबूत
सीमापार व्यापार शुरू होने के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। सीमा पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और व्यापारियों की आवाजाही के लिए आवश्यक सुविधाओं को फिर से सक्रिय किया गया है। अधिकारियों के अनुसार व्यापारिक गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।
लिपुलेख दर्रे से भी शुरू हुई नई पहल
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से भी सीमापार व्यापार की शुरुआत हो गई है। शुरुआती चरण में भारतीय व्यापारियों को सीमा पार जाकर वहां की व्यापारिक व्यवस्थाओं और पहले से रखे गए सामान का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई है। इसके बाद नियमित व्यापारिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार की बहाली से सिक्किम, उत्तराखंड और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों, परिवहन क्षेत्र और स्थानीय बाजारों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही यह कदम भारत और चीन के बीच आर्थिक सहयोग को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Published at : 01 Aug 2026, 03:42 pm (IST)