फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को मात देकर उन्होंने भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला जूडो गोल्ड दिलाया। अस्मिता डे की यह उपलब्धि भारतीय जूडो के इतिहास में मील का पत्थर मानी जा रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार भारत ने जूडो में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इससे आने वाले वर्षों में युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जूडो को नई पहचान भी मिलेगी।
By : Admin User | Updated at : 01 Aug 2026, 01:58 pm (IST)
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराई है। महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला जूडो गोल्ड दिलाया। उनकी इस सफलता ने भारतीय खेल जगत को गर्व का एक और बड़ा पल दिया है।
फाइनल में शानदार जीत
ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे का सामना कनाडा की अनुभवी जूडो खिलाड़ी हाइडी क्वाच से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और गोल्डन स्कोर तक पहुंच गया। निर्णायक क्षणों में अस्मिता ने संयम, तकनीक और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक जीत लिया।
संघर्ष से निकली ऐतिहासिक सफलता
यह जीत अस्मिता डे के लिए केवल एक पदक नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों पर विजय की कहानी भी है। कुछ महीने पहले उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद वह मानसिक रूप से काफी टूट गई थीं। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने खेल छोड़ने का विचार किया, लेकिन परिवार, कोच और साथियों के लगातार समर्थन ने उन्हें फिर से संभलने का हौसला दिया।
दृढ़ संकल्प का परिणाम कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया।
भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक पल
अस्मिता डे की यह उपलब्धि भारतीय जूडो के इतिहास में मील का पत्थर मानी जा रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार भारत ने जूडो में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इससे आने वाले वर्षों में युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जूडो को नई पहचान भी मिलेगी।
Published at : 01 Aug 2026, 01:58 pm (IST)
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