ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद मिडिल-ईस्ट में जंग की आग बुझी नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की चीन यात्रा और राष्ट्रपति ट्रंप की 'वेट एंड वॉच' नीति ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। जानिए क्या है चीन और ईरान का नया प्लान।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
नई दिल्ली/बीजिंग: मिडिल-ईस्ट एक बार फिर मोहरे इस तरह सजाए जा रहे हैं कि दुनिया की महाशक्तियां आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच औपचारिक सीजफायर (Ceasefire) के बावजूद तेहरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का अचानक बीजिंग पहुंचना और चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करना, अमेरिकी प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बन गया है।
ट्रंप की चौकस निगाहें और चीन की कूटनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुलाकात को लेकर बेहद गंभीर हैं। व्हाइट हाउस के सूत्रों का मानना है कि जब अमेरिका और इजरायल युद्ध को और लंबा खींचने के पक्ष में नहीं हैं, तब ईरान का चीन के पास जाना किसी बड़ी 'पर्दे के पीछे' की डील का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका को सबसे बड़ा डर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है, जहाँ ईरान की पकड़ वैश्विक तेल आपूर्ति की गर्दन दबाने की ताकत रखती है।
सीजफायर के नाम पर 'छद्म युद्ध'?
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ ट्रंप प्रशासन यह दावा कर रहा है कि ईरान के साथ सीजफायर लागू है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। खबरें हैं कि ईरान लगातार अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईरान की सोची-समझी रणनीति है वह सैन्य दबाव बनाकर अमेरिका को समझौते की मेज पर अपनी शर्तों के आगे झुकाना चाहता है।
होर्मुज का 'चोक पॉइंट' और मार्को रुबियो की आशंका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में उम्मीद जताई है कि चीन, ईरान पर दबाव बनाएगा ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से अपना कब्जा हटाए। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में सवाल यह है कि क्या चीन वास्तव में अमेरिका की मदद करेगा या वह ईरान के साथ मिलकर मिडिल-ईस्ट में अमेरिका के प्रभाव को कम करने के लिए होर्मुज का इस्तेमाल करेगा?
आगे क्या होगा?
अब्बास अराघची की यह बीजिंग यात्रा युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुई है, जो इसके महत्व को दोगुना कर देती है। यदि चीन और ईरान के बीच कोई रक्षा या सामरिक समझौता होता है, तो यह डोनाल्ड ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। क्या मिडिल-ईस्ट में शांति आएगी या यह सीजफायर सिर्फ एक बड़े तूफान से पहले की खामोशी है? पूरी दुनिया की नजरें अब बीजिंग और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
Published at : 06 May 2026, 06:21 am (IST)
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