यदि यह कानून लागू होता है तो भारत और चीन सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हो सकते हैं। इससे भारत के ऊर्जा आयात, रूस के साथ व्यापार और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
By : Admin User | Updated at : 29 Jul 2026, 12:39 pm (IST)
अमेरिका में रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अमेरिकी सीनेट में रूस को निशाना बनाने वाले व्यापक प्रतिबंध विधेयक पर मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस प्रस्तावित कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखते हैं।
इस प्रस्तावित कानून का नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' रखा गया है। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से होने वाली कमाई को कम करना, यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अतिरिक्त दबाव बनाना है।
भारत और चीन पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?
भारत और चीन दुनिया में रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। खासकर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की थी। इससे देश को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने और रिफाइनिंग सेक्टर को लाभ पहुंचाने में मदद मिली।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में यदि अमेरिकी कानून लागू होता है और भारत पर 100% तक टैरिफ लगाया जाता है, तो इससे भारत के ऊर्जा व्यापार, तेल आयात लागत और वैश्विक व्यापार रणनीति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंध प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिकी सीनेट की वोटिंग और उसके बाद ट्रंप प्रशासन का फैसला भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Published at : 29 Jul 2026, 10:40 am (IST)
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