NEET UG 2026 विवाद में NTA ने दावा किया है कि पेपर लीक नहीं बल्कि सिस्टम कॉम्प्रोमाइज हुआ था। संसदीय समिति में इस बयान पर हंगामा मच गया। CBI जांच, गिरफ्तारियां और गेस पेपर विवाद ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya Samachar
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ाने वाले इस मामले में अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक नया दावा किया है।
संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुए एनटीए अधिकारियों ने कहा कि परीक्षा का पेपर सीधे तौर पर लीक नहीं हुआ था, बल्कि परीक्षा का पूरा सिस्टम “कॉम्प्रोमाइज” हो गया था।
एनटीए अधिकारियों के मुताबिक, प्रश्नपत्र के मराठी अनुवाद से जुड़े कुछ शिक्षकों ने सवाल याद कर लिए थे और बाद में उन्हें कथित तौर पर गेस पेपर के रूप में छात्रों तक पहुंचाया गया। हालांकि समिति के कई सांसदों ने इस दलील पर सवाल उठाए और पूछा कि जब परीक्षा के हूबहू सवाल बाहर आ गए तो इसे पेपर लीक क्यों न माना जाए। बैठक के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
संसदीय समिति में एनटीए महानिदेशक से यह भी पूछा गया कि अगर पेपर लीक नहीं हुआ था तो फिर सीबीआई जांच क्यों कर रही है और परीक्षा दोबारा कराने की जरूरत क्यों पड़ी। इस सवाल पर एनटीए अधिकारियों के जवाबों को लेकर भी सवाल खड़े हुए। सांसदों ने कहा कि अगर सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित था तो फिर इतने बड़े स्तर पर सवाल बाहर कैसे पहुंचे।
इस मामले में सीबीआई जांच लगातार जारी है और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। जांच एजेंसियां परीक्षा केंद्रों, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसलेशन टीम और कथित सॉल्वर गैंग के बीच कनेक्शन तलाश रही हैं। अब तक कई शिक्षकों, कोचिंग संचालकों और अन्य लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ आरोपियों को प्रश्नपत्रों तक पहले से पहुंच मिली हुई थी।
विवाद तब और बढ़ गया जब परीक्षा के बाद वायरल हुए कथित गेस पेपर के कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। खासतौर पर केमिस्ट्री सेक्शन के सवालों के समान होने की बात सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। इसके बाद एनटीए ने अपने स्तर पर जांच शुरू की और बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाखों छात्रों का कहना है कि अगर कुछ लोगों तक पहले से सवाल पहुंच गए थे तो ईमानदारी से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद ने केवल एक परीक्षा ही नहीं बल्कि देश की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की नजर सीबीआई जांच और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हुई है।
Published at : 22 May 2026, 09:07 am (IST)
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