परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक 15 अगस्त के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की बैठक के बाद सरकार विपक्षी दलों से सहमति बनाने में जुटी है। साथ ही FCRA संशोधन विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है।
By : Admin User | Updated at : 05 Aug 2026, 06:47 pm (IST)
नई दिल्ली: संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने और महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, 15 अगस्त के बाद 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, जिसमें सरकार की प्राथमिकता परिसीमन (Delimitation) बिल पर चर्चा और उसे पारित कराने की होगी।
इसी सिलसिले में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच लंबी बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विशेष सत्र, परिसीमन बिल और संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विपक्षी दलों से संपर्क में सरकार
सूत्रों के मुताबिक सरकार इस विधेयक पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए विभिन्न विपक्षी दलों से लगातार संपर्क कर रही है। विपक्ष से संवाद की जिम्मेदारी कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों को सौंपी गई है।
बताया जा रहा है कि:
किरेन रिजिजू राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से बातचीत कर रहे हैं।
प्रह्लाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल और एस. मुरुगन को अन्य विपक्षी दलों से चर्चा की जिम्मेदारी दी गई है।
FCRA संशोधन विधेयक भी हो सकता है पेश
सरकार अगले सप्ताह Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 भी संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक के जरिए विदेशी अंशदान (Foreign Contribution) से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन प्रस्तावित है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और एजेंडा को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कांग्रेस का रुख साफ
कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह परिसीमन बिल का विरोध करेगी। मानसून सत्र से पहले हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी ने फैसला लिया था कि यदि सरकार यह विधेयक लाती है तो उसका विरोध किया जाएगा। सरकार महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करना चाहती है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार:
लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 हो सकती हैं।
इनमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं।
इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा।
यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह देश की संसदीय व्यवस्था और प्रतिनिधित्व प्रणाली में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
Published at : 05 Aug 2026, 06:47 pm (IST)