सरकार का कहना है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे और न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विधेयक पर चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सांसदों ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा
By : Admin User | Updated at : 05 Aug 2026, 06:30 pm (IST)
देश की न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में संसद ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा द्वारा विधेयक पारित किए जाने के साथ ही इसकी संसदीय प्रक्रिया पूरी हो गई, क्योंकि लोकसभा इसे पहले ही ध्वनि मत से पारित कर चुकी थी।
इस संशोधन के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी जाएगी। यह विधेयक केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में पेश किया था। यह मई 2026 में जारी उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके जरिए पहले ही न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2019 के बाद यह सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता में पहली बड़ी वृद्धि है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सांसदों ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि न्यायालयों के बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक और मजबूत बनाया जाना चाहिए।
बीजू जनता दल (बीजेडी) के सांसद सस्मित पात्रा ने सदन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट और देशभर के उच्च न्यायालयों में न्यायिक अवसंरचना को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अदालतों, न्यायाधीशों के कक्ष, रजिस्ट्रार कार्यालय, पुस्तकालय और अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी अपील की।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त कोर्ट रूम, न्यायाधीशों के कक्ष, रजिस्ट्रार कार्यालय, बार एसोसिएशन पुस्तकालय और अधिवक्ताओं के लिए अधिक चैंबर की आवश्यकता पर जोर दिया था। वर्तमान में उपलब्ध अधिवक्ता कक्षों की संख्या जरूरत के मुकाबले काफी कम है।
सस्मित पात्रा ने अपने संबोधन में कहा कि यह विधेयक केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था पर संसद के विश्वास का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत सुप्रीम कोर्ट संविधान की सुरक्षा और लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।
सरकार का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने में सहायता मिलेगी।
Published at : 05 Aug 2026, 06:30 pm (IST)