रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े लोन घोटाले में ED ने दो पूर्व अधिकारियों को 5 दिन की हिरासत में लिया। ₹11,000 करोड़ के फंड डायवर्जन और शेल कंपनियों का खुलासा। पढ़ें पूरी खबर।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े कथित बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ग्रुप के दो पूर्व सीनियर अधिकारियों अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है।
कोर्ट के 24 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान ED को ऐसे ठोस सबूत मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि लोन की भारी रकम को कथित तौर पर शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। ये कंपनियां कथित रूप से उसी ग्रुप के नियंत्रण में थीं, जिससे फंड डायवर्जन का शक और मजबूत हो गया है।
ईडी ने दोनों आरोपियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित लोन घोटाले से संबंधित है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को 5 दिन की कस्टडी में भेजा जाता है और उन्हें 20 अप्रैल को दोबारा पेश किया जाएगा।
अमिताभ झुनझुनवाला रिलायंस ग्रुप में ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। वहीं, अमित बापना कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) और RHFL के डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।
कोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज का भुगतान नहीं किया गया और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत करीब ₹11,000 करोड़ से अधिक की रकम ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ के रूप में सामने आई है।
डिजिटल सबूत, खासकर ईमेल, इस मामले में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ईमेल से यह स्पष्ट होता है कि लोन की राशि को योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। कुछ मामलों में तो यह ट्रांसफर उसी दिन किया गया, जिस दिन संबंधित खातों को NPA घोषित किया गया था।
27 फरवरी 2019 के एक ईमेल का हवाला देते हुए कोर्ट ने बताया कि अमित बापना नियमित रूप से झुनझुनवाला को शेल कंपनियों से जुड़ी जानकारी और वित्तीय विवरण साझा कर रहे थे, जिससे उनकी सक्रिय भूमिका का संकेत मिलता है।
हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि कई फैसले शीर्ष प्रबंधन के निर्देशों पर लिए गए थे और उनके मुवक्किल सिर्फ निर्देशों का पालन कर रहे थे। कोर्ट ने इस तर्क को रिकॉर्ड पर लिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं करते। फिलहाल, ईडी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन शामिल था। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
Published at : 17 Apr 2026, 11:35 am (IST)
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