भारी बारिश के कारण हवाई मार्ग उपलब्ध नहीं होने पर सूरत से अहमदाबाद तक जीवित मानव हृदय को पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से पहुंचाया गया। रेलवे, आरपीएफ, गुजरात पुलिस और चिकित्सा टीम के समन्वय से यह मिशन तय समय में पूरा हुआ, जिससे मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट संभव हो सका।
By : Admin User | Updated at : 01 Aug 2026, 05:31 pm (IST)
भारतीय रेलवे ने चिकित्सा आपातकालीन सेवाओं में एक नई मिसाल कायम करते हुए पहली बार ट्रेन के जरिए जीवित मानव हृदय को सफलतापूर्वक एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाया। यह ऐतिहासिक मिशन सूरत से अहमदाबाद के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से पूरा किया गया, जिससे समय रहते हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी शुरू की जा सकी।
अंगदान से शुरू हुई जीवन बचाने की दौड़
सूरत सिविल अस्पताल में एक ब्रेन डेड मरीज के परिजनों ने अंगदान का फैसला लिया। डॉक्टरों ने मरीज का हृदय ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाया, जिसके बाद उसे अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर पहुंचाने की तैयारी शुरू हुई।
खराब मौसम में रेलवे बना सबसे भरोसेमंद विकल्प
दक्षिण गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के कारण एयर एम्बुलेंस का इस्तेमाल संभव नहीं था। ऐसे में चिकित्सा टीम और प्रशासन ने समय बचाने के लिए मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20901) को चुना। तेज रफ्तार और समय की पाबंदी के कारण यह निर्णय जीवनरक्षक साबित हुआ।
ग्रीन कॉरिडोर ने बनाया सफर आसान
पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए सूरत रेलवे स्टेशन से अहमदाबाद रेलवे स्टेशन और वहां से अस्पताल तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), गुजरात पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने यातायात को नियंत्रित कर एम्बुलेंस को बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाया।
साढ़े तीन घंटे में तय हुई 250 किलोमीटर की दूरी
धड़कते हृदय को लगभग 250 किलोमीटर की दूरी महज 3 घंटे 37 मिनट में सुरक्षित अहमदाबाद पहुंचाया गया। समय पर अंग पहुंचने के कारण डॉक्टरों ने तुरंत हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की, जिससे मरीज को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद बनी।
रेलवे और स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय की मिसाल
यह पहली बार है जब भारत में किसी जीवित मानव हृदय को ट्रेन के जरिए ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचाया गया। इस उपलब्धि ने साबित किया कि आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे केवल यातायात का माध्यम ही नहीं, बल्कि जीवन बचाने का भी महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।
नई उम्मीद की कहानी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। रेलवे, स्वास्थ्य विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के बेहतर समन्वय ने दिखाया कि सही योजना और समयबद्ध कार्रवाई से असंभव लगने वाले मिशन भी सफल बनाए जा सकते हैं।
Published at : 01 Aug 2026, 05:31 pm (IST)