शिकायत में आरोपियों पर 1,900 करोड़ रुपए की फाइनेंशियल गड़बड़ियां, मनी लॉन्ड्रिंग और शिकायत करने वाले के परिवार के जाली साइन करके शेयरहोल्डिंग कम करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपियों ने इसे सिविल विवाद बताते हुए देरी के आधार पर शिकायत खारिज करने की दलील दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना।
Updated at : 18 Mar 2026 10:06 PM (IST)
Published at : 18 Mar 2026 09:39 PM (IST)
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