शिकायत में आरोपियों पर 1,900 करोड़ रुपए की फाइनेंशियल गड़बड़ियां, मनी लॉन्ड्रिंग और शिकायत करने वाले के परिवार के जाली साइन करके शेयरहोल्डिंग कम करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपियों ने इसे सिविल विवाद बताते हुए देरी के आधार पर शिकायत खारिज करने की दलील दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
सूरत. गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत के उद्योगपति वसंत गजेरा और दूसरे आरोपियों के खिलाफ दर्ज करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी और डॉक्यूमेंट्स से छेड़छाड़ के मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग खारिज करते हुए पुलिस जांच में दखल देने से साफ मना कर दिया है।
गत 22 फरवरी 2026 को सूरत के DCB पुलिस स्टेशन में दर्ज इस शिकायत में आरोपियों पर 1,900 करोड़ रुपए की फाइनेंशियल गड़बड़ियां, मनी लॉन्ड्रिंग और शिकायत करने वाले के परिवार के जाली साइन करके शेयरहोल्डिंग कम करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपियों ने इसे सिविल विवाद बताते हुए देरी के आधार पर शिकायत खारिज करने की दलील दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना।
केस डिटेल्स के मुताबिक, फिरयादी की ओर से आरोप लगाया गया कि डॉक्यूमेंट्स पर उनके और उनके परिवार के जाली साइन किए गए थे, जिसकी वजह से कंपनी में उनकी शेयरहोल्डिंग 43% से घटकर सिर्फ़ 4% रह गई थी। इसके अलावा,यह भी दावा किया गया कि डायरेक्टर के पद से इस्तीफ़ा देने वाला लेटर भी जाली था। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने गांधीनगर FSL की रिपोर्ट पेश की और बताया कि डॉक्यूमेंट्स पर सिग्नेचर जाली थे और उनका मानना था कि ये राकेश गजेरा ने किए थे। इस ज़रूरी सबूत को ध्यान में रखते हुए जस्टिस एम.आर. मेंगडे ने कहा कि जब सिग्नेचर एक्सपर्ट की रिपोर्ट पिटीशनर्स के खिलाफ़ है और पहली नज़र में जुर्म साबित होता है, तो जांच में देरी दूसरी बात हो जाती है। हालांकि हाई कोर्ट ने यह साफ़ कर दिया है कि FSL रिपोर्ट कितनी सही है और इस पर किसने साइन किए हैं, यह ट्रायल के दौरान क्रॉस-एग्जामिनेशन का विषय है। इस स्टेज पर, क्योंकि डॉक्यूमेंट्री फ्रॉड के काफी सबूत हैं, इसलिए जांच को बीच में रोकना न्याय के हित में नहीं है। इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने स्टे की मांग को भी खारिज कर दिया है, जिसकी वजह से अब इन इंडस्ट्रियलिस्ट्स को कानूनी जांच और सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
सीनियर वकीलों ने यह भी दलील दी कि शिकायत करने वाले ने यह शिकायत सिर्फ़ बदला लेने और पैसे ऐंठने के लिए की है, पिटीशनर्स का मेहुल चोकसी से कोई गैर-कानूनी कनेक्शन नहीं है।
Published at : 18 Mar 2026, 04:09 pm (IST)
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