शहर के कारोबारी केतन पटेल की शिकायत के आधार पर सूरत पुलिस की इको सेल ने एशियन लॅब-ग्रोन डायमंड कंपनी के अंकुश नाकराणी और संदीप जसाणी को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने निवेश और उत्पादन के नाम पर लगभग ₹3.50 करोड़ की राशि प्राप्त की,लेकिन बाद में न तो तय अनुसार कारोबार चलाया और न ही निवेशक को उसका पैसा वापस किया।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya Samachar / police
सूरत. 30 may. सूरत के लॅब-ग्रोन डायमंड उद्योग में एक बार फिर करोड़ों के वित्तीय विवाद ने हलचल मचा दी है। शहर के कारोबारी केतन पटेल की शिकायत के आधार पर सूरत पुलिस की इको सेल ने एशियन लॅब-ग्रोन डायमंड कंपनी के अंकुश नाकराणी और संदीप जसाणी को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने निवेश और उत्पादन के नाम पर लगभग ₹3.50 करोड़ की राशि प्राप्त की,लेकिन बाद में न तो तय अनुसार कारोबार चलाया और न ही निवेशक को उसका पैसा वापस किया।
शिकायत के अनुसार, अंकुश नाकराणी और संदीप जसाणी ने शहर में होफ फर्निचर के मालिक तथा हीरा व्यवसाय से भी जुड़े केतन पटेल को लॅब-ग्रोन डायमंड निर्माण के व्यवसाय में निवेश करवाया था। उन्होंने झांसा दिया था कि उनकी कंपनी नियमित रूप से बड़ी मात्रा में लॅब-ग्रोन हीरे तैयार कर सकती है और निवेश पर अच्छा लाभ मिलेगा।
बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच एक नोटरीकृत करार भी किया गया था। इस करार के तहत हर महीने निश्चित संख्या में लॅब-ग्रोन डायमंड उपलब्ध कराने की बात तय हुई थी। कारोबारी केतन पटेल ने इस स्कीम पर भरोसा करते हुए स्वयं तथा विदेश में रहने वाले अपनी बहन तथा जीजा के माध्यम से 3.50 करोड़ का निवेश किया। शुरुआती दौर में कुछ हीरे की सप्लाय भी की गई, जिससे केतन पटेल का भरोसा और मजबूत हुआ़, लेकिन बाद में हीरे देना बंद कर दिया। शिकायत के अनुसार,जब हीरे की सप्लाय बंद कर दी तो केतन पटेल ने अपनी राशि वापस मांगी गई तो टालमटोल शुरू हो गई और अंततः फोन उठाना भी बंद कर दिया।
केतन पटेल ने मामले की शिकायत क्राईम ब्रान्च में की. जांच सूरत इको सेल को सौंपी गई। टेक्निकल सर्वेलन्स और दस्तावेजी जांच के आधार पर पुलिस ने कुश नाकराणी और संदीप जसाणी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शुक्रवार को दोनों को कोर्ट में पेश किया।
अंकुश नाकराणी का नाम इससे पहले भी एक आर्थिक अपराध मामले में सामने आ चुका है।
वर्ष 2013 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने SIDBI (स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया) से जुड़े एक बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले की जांच शुरू की थी। CBI के आरोपों के अनुसार, टेक्सटाइल मशीनरी आयात से संबंधित कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग ₹2 करोड़ का ऋण प्राप्त किया गया था। मामले की सुनवाई वर्षों तक चली और दिसंबर 2025 में CBI की विशेष अदालत ने अंकुश नाकराणी सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। यह केस आज भी उपरी अदालतमें चल रहा है।
Published at : 30 May 2026, 02:14 pm (IST)
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