दिग्गज प्लेबैक सिंगर सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार तुम्हीं से' जैसे सदाबहार गीतों से पहचान बनाने वाली गायिका को संगीत जगत ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya samachar
भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार को 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही सुमन के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म, संगीत और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
सुमन कल्याणपुर ने छह दशक से अधिक लंबे करियर में हिंदी, मराठी समेत कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए। उनकी मधुर आवाज ने उन्हें भारतीय संगीत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल किया। "आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे", "ना ना करते प्यार तुम्हीं से", "तुमने पुकारा और हम चले आए" और "परबतों के पेड़ों पर" जैसे उनके गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं।

उनके निधन पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुमन कल्याणपुर की मधुर, सुरीली और भावपूर्ण आवाज ने भारतीय संगीत जगत को समृद्ध किया। हिंदी, मराठी और कई अन्य भाषाओं में गाए गए उनके गीतों ने पीढ़ियों तक लोगों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। पवार ने उनके निधन को भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत बताया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सुमन कल्याणपुर के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत जगत की एक मधुर और दिल को छू लेने वाली आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई है। फडणवीस ने कहा कि छह दशकों से अधिक समय तक सुमन कल्याणपुर ने अपनी गायकी से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया और उनके गीत संगीत जगत की अमूल्य धरोहर बने रहेंगे।

साल 1937 में अविभाजित भारत के ढाका में जन्मीं सुमन कल्याणपुर की आवाज की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से की जाती थी। हालांकि उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी प्रतिभा के दम पर संगीत जगत में विशिष्ट स्थान हासिल किया। मोहम्मद रफी के साथ उनके गाए कई युगल गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं।
संगीत के प्रति उनका समर्पण बचपन से ही दिखाई देता था। उन्होंने पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे प्रतिष्ठित गुरुओं से संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी। फिल्मी गीतों के अलावा उन्होंने भजन, ग़ज़ल, मराठी भावगीत और अभंग गायन में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।
भारत सरकार ने उनके संगीत योगदान को सम्मान देते हुए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक अनमोल आवाज खो दी है। हालांकि उनके गीत और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और संगीत का खजाना बने रहेंगे।
Published at : 01 Jun 2026, 05:05 am (IST)
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