वाहन नंदुरबार जिले के चंदशैली घाट पर पहुँचा, तो चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन पलट गया। इस वाहन में लगभग 40 श्रद्धालु सवार थे। कई लोग वाहन के नीचे कुचले गए।
@RashtriaSamacharBharat
Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)
मुंबई, 18 अक्टूबर। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिला स्थित चंद्रशैली घाट पर शनिवार को सुबह अष्टम पर्वत यात्रा के लिए गया एक वाहन पलट गया। इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई जबकि 20 यात्री घायल हुए हैं। इन सभी को तलोदा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही नंदुरबार पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और राहत और बचाव कार्य कर रही है। इस घटना में मृतकों की संख्या बढऩे की संभावना है। इसकी छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि शनिवार की सुबह धनतेरस के अवसर पर श्रद्धालुओं को लेकर एक निजी मालवाहक वाहन अष्टम पर्वत यात्रा के लिए गया था। सुबह जब वाहन नंदुरबार जिले के चंदशैली घाट पर पहुँचा, तो चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन पलट गया। इस वाहन में लगभग 40 श्रद्धालु सवार थे। कई लोग वाहन के नीचे कुचले गए। इस दुर्घटना में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 20 यात्री घायल हुए हैं। गंभीर रूप से घायलों को नंदुरबार जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों को तलोदा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों और घायलों में से कई नंदुरबार जिले के शहादा तालुका के भूराती और वैजली के निवासी हैं। कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढऩे की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि भारत में कहीं भी अश्वत्थामा के स्थान का उल्लेख नहीं है, लेकिन नंदुरबार जिले की सतपुड़ा पर्वतमाला में चार हज़ार फुट ऊँचे पर्वत पर स्थित अष्टम्ब ऋषि के नाम से उनका स्थान है। एक किंवदंती के अनुसार, शापित अवस्था में घायल अश्वत्थामा घाटी में तेल माँगते हैं और कभी-कभी रास्ते में भटके तीर्थयात्रियों का मार्गदर्शन भी करते हैं, इसलिए हर साल धनतेरस से हज़ारों भक्त दो दिनों के लिए अष्टम्ब यात्रा पर निकलते हैं।
मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से हजारों भक्त पहाड़ की चोटी पर आते हैं, जो शूलपाणि वन के बीच लगभग 4,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। शिखर पर पहुंचने के बाद, वहां एक पत्थर है। भक्त इसकी पूजा करते हैं। फिर वे अपनी वापसी यात्रा फिर से शुरू करते हैं। हालांकि शिखर पर बहुत कम जगह है, फिर भी सभी को वहां बैठने की जगह मिल जाती है। दिवाली उत्सव के दौरान आयोजित होने वाली इस तीर्थयात्रा के लिए भक्तों के समूह रवाना होते हैं। वे तलोदा शहर से कोठार-देवनदी-असली-नकट्यादेव-जूना अस्तंभ-भीमकुंड्या होते हुए चलते हैं। जंगली जानवरों को दूर रखने के लिए, इस तीर्थयात्रा में ड्रम, आग के लिए टायर, दीपक, मशाल, मशाल जैसी लंबे समय तक जलने वाली वस्तुएं साथ ले जाई जाती हैं। रात में यात्रा करने के बाद, वे अस्तंब ऋषि के शिखर पर जाते हैं और धनत्रयोदशी को भोर में दर्शन करते हैं और ध्वज स्थापित करते हैं ।
Published at : 18 Oct 2025, 09:06 am (IST)
Tags : Fatal Road Accident