राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की लगातार मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च से जुलाई के बीच नौ महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें छह दिनों के अंदर पांच मौतें शामिल हैं।
By : Admin User | Updated at : 11 Jul 2026, 12:32 pm (IST)
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला चिंता का विषय बनता जा रहा है। कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले छह दिनों में अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि मार्च से जुलाई के बीच कुल नौ महिलाओं की जान जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि सभी मृत महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सबसे हालिया मामला पोटला निवासी संगीता जीनगर का है, जिनकी सिजेरियन डिलीवरी के बाद हालत गंभीर हो गई थी। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसव के बाद कई महिलाओं की मौत से सवाल उठ रहे हैं। शिमला गुर्जर, फोरी देवी, ईशा पांडे और दिव्या की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के बाद ऑपरेशन प्रक्रिया और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण और प्रसूताओं की मौत के बीच सीधा संबंध है या नहीं। अस्पताल प्रशासन ने इलाज में किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कई मरीज गंभीर हालत में रेफर होकर आते हैं और मौतें चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई हैं। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं। वहीं, नियमित उपयोग के लिए सीमित संख्या में सर्जिकल सेट उपलब्ध होने और उनकी स्टरलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
लगातार हो रही मौतों और संक्रमण रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सबकी नजर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या कारण सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन कौन से ठोस कदम उठाता है।
Published at : 11 Jul 2026, 12:31 pm (IST)