भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाते हुए स्वदेशी युद्धपोत INS महेंद्रगिरि अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली से लैस यह युद्धपोत हवा, समुद्र और पानी के नीचे मौजूद खतरों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है।
By : Admin User | Updated at : 11 Jul 2026, 04:55 pm (IST)
भारतीय नौसेना को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी मजबूती मिली है। विशाखापत्तनम स्थित नौसेना डॉकयार्ड में आयोजित समारोह के दौरान स्वदेशी युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना की ईस्टर्न फ्लीट में शामिल किया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे देश की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के क्षेत्र में तेजी से एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि INS महेंद्रगिरि आधुनिक तकनीक से लैस ऐसा युद्धपोत है, जो हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत
INS महेंद्रगिरि में दुश्मन के रडार से बचने वाली स्टेल्थ तकनीक, उन्नत सेंसर, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और अत्यधिक ऑटोमेशन जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसके कारण यह युद्धपोत विभिन्न प्रकार के समुद्री अभियानों को प्रभावी तरीके से अंजाम देने में सक्षम है। जहाज में लगाए गए स्वदेशी हथियार और रक्षा प्रणालियां इसे बहुआयामी युद्ध क्षमता प्रदान करती हैं।
75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी निर्माण
INS महेंद्रगिरि की सबसे बड़ी विशेषता इसका 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी निर्माण है। युद्धपोत के अधिकांश उपकरण, तकनीक और सिस्टम भारत में विकसित किए गए हैं। इसके निर्माण में देश की अनेक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिला है।
कई तरह के मिशनों में निभाएगा अहम भूमिका
यह युद्धपोत केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा। INS महेंद्रगिरि समुद्री सुरक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue), मानवीय सहायता (Humanitarian Assistance), आपदा राहत (Disaster Relief) और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक तैनाती जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी भूमिका निभाएगा। इसकी लंबी दूरी तक संचालन क्षमता इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशनों के लिए भी उपयुक्त बनाती है।
नाम के पीछे खास महत्व
इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। यह पहला भारतीय नौसैनिक जहाज है जिसे "महेंद्रगिरि" नाम दिया गया है। यह नाम शक्ति, दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
समुद्री सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
INS महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह युद्धपोत भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसेना की परिचालन क्षमता को भी और मजबूत करेगा। जहाज का आदर्श वाक्य "Mighty – Majestic – Matchless" इसकी शक्ति, गौरव और अद्वितीय क्षमता को दर्शाता है।
Published at : 11 Jul 2026, 04:15 pm (IST)