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होम / सियासत / बिहार चुनाव : राघोपुर सीट पर फिर लहराएगा राजद का झंडा ? पीके ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी भी तैयार
बिहार चुनाव : राघोपुर सीट पर फिर लहराएगा राजद का झंडा ? पीके ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी भी तैयार
विधानसभा चुनाव 2025 की सबसे हॉट सीट है राघोपुर

तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से इस बार भी चुनाव लड़ने वाले हैं। ऐसे में इस सीट के इतिहास से जोड़कर सीट का समीकरण, सबका ध्यान खींच सकता है। राजद की पारंपरिक सीट होने के कारण और इस चुनाव में प्रशांत किशोर के होने के कारण ये सीट 2025 विधानसभा चुनाव की सबसे हॉट सीट बन गयी है।

बिहार चुनाव : राघोपुर सीट पर फिर लहराएगा राजद का झंडा ? पीके ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी भी तैयार

बिहार के चुनाव में सियासी घमासान

Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)

पटना। 1951 के दौर में कांग्रेस, सोशलिस्ट पार्टी और जनसंघ जैसी पार्टियों का गढ़ रहने वाली सीट, जिस पर 1995 से लालू प्रसाद यादव का प्रभाव बनता गया, ये सीट है राघोपुर. 2025 के विधानसभा चुनाव में भी ये सीट हॉट सीट रहेगी क्यूंकि ये सीट राजद की पारंपरिक सीट है। फ़िलहाल इस सीट को लेकर लगातार चर्चा शुरू है क्यूंकि इस सीट से वर्तमान विधायक है नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। इस बार के विधानसभा चुनाव में भी तेजस्वी ही इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट का इतिहास ही राजद से जुड़ा रहा है। हालाँकि साल 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद की उम्मीदवार राबड़ी देवी को जदयू के उमीदवार, सतीश कुमार ने हार का मुहं दिखाया था। लेकिन उसके बाद से ही लगातार इस सीट से राजद के उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर रहे हैं। पिछले 2 चुनाव यानी 2015 और 2020 में आरजेडी से तेजस्वी ही खड़े हुए और उन्होंने भारी मार्जिन से जदयू  के उम्मीदवार सतीश कुमार को हराया भी। 

फिर जलेगा तेजस्वी का लालटेन ? 

तेजस्वी इस सीट को लेकर आश्वस्त है, उसके पीछे की वजह है इस सीट का चुनावी समीकरण। ये सीट यादव बहुल सीट मानी जाती है। सबसे ज्यादा 31% आबादी के साथ इस इलाके में राजपूत, मुस्लिम व पासवान समुदाय भी प्रभावशाली भूमिकाओं में हैं। ये रिकॉर्ड बहुत अहम है की इस सीट पर 8 चुनाव में से 7 चुनावों में राजद ने जीत दर्ज की। हालाँकि राज्य की सत्ता में काबिज़ और बिहार में दुसरे नंबर की पार्टी भाजपा ने इस सीट पर अब तक जीत दर्ज नहीं की है। वहीँ 1969 से लेकर अब तक कांग्रेस ने भी जीत दर्ज नहीं की है। यही कारण है तेजस्वी ने इस सीट से बिगुल फूंकना शुरू कर दिया है। 

राघोपुर ने बार बार दिया बीजेपी को झटका। 

राघोपुर सीट को लेकर सत्ता में काबिज़ एनडीए की तरफ से भी जोर आज़माइश की जा रही है, सिर्फ इसलिए क्यूंकि बीजेपी को उम्मीद है की विकास से जुड़े मुद्दों को उठाकर शायद वो इस सीट पर तेजस्वी और राजद को नुक्सान पहुंचा सकती है। दरअसल  लगातार विकास नहीं होने, क्षेत्रीय समस्याओं तथा विपक्षी सक्रियता के कारण भी इस चुनाव में ये सीट एक अहम सीट बन चुकी है और सत्ताधीन गठबंधन इसे मुद्दा बना रहा है। इस सीट के प्रमुख मुद्दों की बात की जाए तो क्षेत्र की विकास योजनाएँ, सड़क–बाढ़ संकट, रोजगार और राजनीतिक वर्चस्व जैसे ,मुद्दे अहम है। राजनीतिक वर्चस्व इसलिए क्यूंकि शुरू से ही ये सीट    राजद की ही रही है। जब भी राघोपुर के परिणाम आते हैं तो विश्लेषकों की माने तो नतीजे काफी हद तक सामाजिक समीकरणों, जातीय समीकरणों और परिवारवाद की राजनीति से प्रभावित होते हैं। 

पिछले कुछ चुनावों का हाल। 

2020 यानी पिछले चुनाव में तेजस्वी ने भाजपा के सतीश कुमार को 38,174 वोटों से हार का मुहं दिखाया था। तेजस्वी को 90,404 वोट मिले थे, उनके सामने खड़े भाजपा के कैंडिडेट को 59,230 वोट मिले। हालाँकि लोजपा के कैंडिडेट राकेश रोशन ने वोट काटने का काम किया जिन्हें  24,947 वोट मिले। बात की जाए 2015 की तो इस सीट पर तेजस्वी जीते ज़रूर थे मगर पिछले साल के चुनाव के मुकाबले मार्जिन थोडा कम था। तेजस्वी को 2015 के चुनाव में  91,236 वोट मिले तो वहीँ उनके सामने खड़े भाजपा के सतीश कुमार को 68,503 वोट मिले। उस वक़्त राकेश रौशन सपा में थे जिन्हें 5,220 वोटों से संतुष्टि करनी पड़ी। हालाँकि 2010 ही ऐसा चुनाव था जिसमें जदयू के सतीश कुमार को 64,222 वोट मिले थे,. वहीँ आरजेडी से उम्मीदवार और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हार का मुहं देखना पड़ा। उन्हें  51,216 वोट मिले। वहीँ निर्दलीय उम्मीदवार रिजवानुल आज़म को 3,877 वोट मिले। 2005 में राजद के अनिल कुमार यादव ने  भाजपा के जनार्दन यादव को हार का मुहं दिखाया।  1995 में जेडीयू के दयानंद यादव ने भाजपा के जनार्दन यादव को हार का मुहं दिखाया था।     

इस बार वैशाली की रघौपुर सीट पर नज़रें इसलिए भी है क्यूंकि जनसुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर भी इसी सीट से चुनाव लड़ने वाले थे हालाँकि उनका ये ऐलान हो चुका है की प्रशांत किशोर अपनी जन्मभूमि रोहतास जिले की करगहर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। यानी तेजस्वी यादव कुछ हद तक राहत की सांस ले सकते हैं मगर फिर भी क्यूंकि प्रशांत किशोर वैशाली को अपनी कर्मभूमि बता चुके हैं तो तेजस्वी के सामने वो किसी ऐसे ही प्रतिद्वंदी को उतारेंगे जो तेजस्वी को टक्कर दे पाए। वहीँ बीजेपी ने भी तयारी की हुई है ऐसे में इस सीट पर मुकाबला कांटे की टक्कर का होने वाला है।