भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर उन्होंने 18 अंकों के साथ टूर्नामेंट अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वह नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार हराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya samachar
भारतीय शतरंज के युवा सितारे आर. प्रज्ञानानंदा ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करते हुए प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीत लिया है। 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर कुल 18 अंकों के साथ चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
चेन्नई के रहने वाले प्रज्ञानानंदा ने अंतिम दिन की शुरुआत 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर की थी। खिताब जीतने के लिए उन्हें हर हाल में जीत की जरूरत थी और उन्होंने दबाव के बीच शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए क्लासिकल मुकाबले में कीमर को मात दी। इस जीत से उन्हें तीन महत्वपूर्ण अंक मिले और वह सीधे शीर्ष स्थान पर पहुंच गए।
यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के लिए बेहद खास मानी जा रही है। वर्ष 2013 में नॉर्वे चेस टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से अब तक कोई भी भारतीय खिलाड़ी यह खिताब नहीं जीत पाया था। शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी इस उपलब्धि से दूर रहे थे, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने इतिहास रचते हुए भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया।
नॉर्वे चेस में यह प्रज्ञानानंदा की दूसरी भागीदारी थी। टूर्नामेंट की शुरुआत उनके लिए चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन दूसरे हाफ में उन्होंने शानदार वापसी की। उनके अभियान की सबसे बड़ी खासियत विश्व नंबर-1 और सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में दो बार हराना रहा। यह उपलब्धि उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और संघर्षशीलता को दर्शाती है।
खिताबी दौड़ में अमेरिका के वेस्ली सो अंतिम राउंड से पहले 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर थे। उनका मुकाबला फ्रांस के अलीरेजा फिरूजा के खिलाफ ड्रॉ रहा, जिसके बाद परिणाम का फैसला आर्मागेडन टाईब्रेकर से हुआ। वेस्ली सो ने टाईब्रेकर जीतकर 1.5 अंक हासिल किए, लेकिन उनका कुल स्कोर 17 अंक तक ही पहुंच सका।
वहीं, प्रज्ञानानंदा 18 अंकों के साथ उनसे एक अंक आगे निकल गए और खिताब अपने नाम कर लिया। अलीरेजा फिरूजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। दूसरी ओर, विश्व चैंपियन डी. गुकेश का अभियान उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। अंतिम दौर में मैग्नस कार्लसन ने उन्हें क्लासिकल मुकाबले में हराया।
हालांकि यह जीत भी कार्लसन को खिताबी दौड़ में वापस नहीं ला सकी और वह 13 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहे। प्रज्ञानानंदा की यह जीत भारतीय शतरंज के स्वर्णिम भविष्य का संकेत है। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने जिस तरह वापसी की, उसने साबित कर दिया कि वह विश्व शतरंज के सबसे प्रतिभाशाली और खतरनाक खिलाड़ियों में से एक हैं। नॉर्वे चेस 2026 का खिताब उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाएगा और यह जीत भारतीय शतरंज के इतिहास में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
Published at : 06 Jun 2026, 06:03 am (IST)
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