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होम / अंतरराष्ट्रीय / गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की बड़ी सफलता : ‘द घोस्ट’ नाम से अंतरराष्ट्रीय ‘साइबर स्लेवरी’ रैकेट चलाने वाला मास्टरमाइंड नील पुरोहित गिरफ्तार
गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की बड़ी सफलता : ‘द घोस्ट’ नाम से अंतरराष्ट्रीय ‘साइबर स्लेवरी’ रैकेट चलाने वाला मास्टरमाइंड नील पुरोहित गिरफ्तार
राज्य सरकार ने नागरिकों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए यह ऐतिहासिक कार्रवाई की है

आरोपी नील पुरोहित उर्फ़ निलेश ‘द घोस्ट’ नाम से एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चला रहा था। यह नेटवर्क म्यांमार के KK पार्क और कंबोडिया स्थित साइबर माफिया केंद्रों के लिए भारतीय युवाओं की तस्करी करता था। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तकनीकी जांच टीम ने उसे मलेशिया भागने की कोशिश के दौरान गांधीनगर से दबोच लिया।

गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की बड़ी सफलता : ‘द घोस्ट’ नाम से अंतरराष्ट्रीय ‘साइबर स्लेवरी’ रैकेट चलाने वाला मास्टरमाइंड नील पुरोहित गिरफ्तार

@RashtriyaSamacharBharat

Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)

गांधीनगर, 18 नवंबर।  राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने अंतरराष्ट्रीय स्कैम सिंडिकेट से जुड़े मानव तस्करी और साइबर अपराध के गंभीर मामले का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई से एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ है। राज्य सरकार ने नागरिकों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए यह ऐतिहासिक कार्रवाई की है।

मास्टरमाइंड नील पुरोहित गिरफ्तार
जांच में सामने आया है कि आरोपी नील पुरोहित उर्फ़ निलेश ‘द घोस्ट’ नाम से एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चला रहा था। यह नेटवर्क म्यांमार के KK पार्क और कंबोडिया स्थित साइबर माफिया केंद्रों के लिए भारतीय युवाओं की तस्करी करता था। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तकनीकी जांच टीम ने उसे मलेशिया भागने की कोशिश के दौरान गांधीनगर से दबोच लिया।

उसके दो मुख्य साथी – सब-एजेंट हितेश सोमैया और सोनल फलदु – को भी गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने नील पुरोहित को 14 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। रैकेट में शामिल अन्य दो आरोपियों, भावदीप जाडेजा और हरदीप जाडेजा को भी हिरासत में लिया गया है।

126 से अधिक एजेंट और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा
तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि नील पुरोहित 126 से अधिक सब-एजेंटों का संचालन करता था और 30 से अधिक पाकिस्तानी एजेंटों के संपर्क में था। वह 100 से अधिक चीनी और विदेशी कंपनियों के एचआर नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, जो कथित रूप से साइबर फ्रॉड स्कैम कैंपों के लिए लोगों की ‘सप्लाई’ करते थे।

आरोपी ने 1,000 से अधिक भारतीयों को म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों में काम दिलाने के बहाने भेज दिया था। इनमें से कई लोगों को साइबर स्लेवरी के तहत डिजिटल ठगी, फिशिंग, क्रिप्टो स्कैम, पोंजी स्कीम और डेटिंग ऐप के जरिए धोखाधड़ी करने पर मजबूर किया गया।

मॉडस ऑपरेंडी – सोशल मीडिया पर झूठे जॉब ऑफर
आरोपी टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऊंची तनख्वाह वाली विदेशों की डेटा एंट्री नौकरियों का झांसा देकर युवाओं को फंसाता था। एक बार जब कोई शिकार उसके जाल में फंस जाता, तो उसका पासपोर्ट जब्त कर उसे बंधक बना लिया जाता था।

इसके बाद उन्हें गैरकानूनी तरीके से म्यांमार के म्यावाडी टाउनशिप या KK पार्क जैसे चीनी प्रभाव वाले क्षेत्रों में भेज दिया जाता, जहां उन्हें ऑनलाइन साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था। जो लोग इनकार करते, उन्हें मानसिक और शारीरिक यातना दी जाती थी।

करोड़ों रुपये के लेनदेन और क्रिप्टो वॉलेट्स
प्रारंभिक जांच से सामने आया है कि आरोपी प्रत्येक व्यक्ति की तस्करी पर 2,000 से 4,500 डॉलर (लगभग 1.6 से 3.7 लाख रुपये) तक कमीशन लेता था और इसमें से 30 से 40 प्रतिशत राशि अपने सब-एजेंटों को देता था। उसने पैसों के लेनदेन को छिपाने के लिए कई ‘म्यूल अकाउंट्स’ और 5 से अधिक क्रिप्टो वॉलेट्स का इस्तेमाल किया। करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन इन माध्यमों से किए गए।

भारत सरकार का सहयोगी अभियान
भारत सरकार ने थाईलैंड और म्यांमार की सरकारों के सहयोग से सेना की मदद से एक विशेष अभियान चलाया, जिसमें पिछले तीन वर्षों में लगभग 4,000 भारतीय नागरिकों को साइबर स्लेवरी शिविरों से छुड़ाया गया। अधिकांश पीड़ितों के बयानों में एजेंट के रूप में नील पुरोहित का नाम सामने आया, जो इस गिरफ्तारी में सबसे बड़ी कड़ी साबित हुआ।

पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
यह अभियान CID क्राइम के डीजी डॉ. के.एल.एन. राव और डीआईजी परीक्षित राठौड़ के निर्देश पर, एसपी डॉ. राजदीपसिंह झाला, संजय केशवाला और विवेक भेड़ा के पर्यवेक्षण में चलाया गया। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तकनीकी टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।

सरकार का बयान
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राज्य के नागरिकों को साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसे खतरे से बचाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित ऐतिहासिक कार्य कर रहा है। उन्होंने पूरी टीम को इस बड़ी सफलता के लिए बधाई दी।

Published at : 18 Nov 2025, 07:45 pm (IST)