भारतीय वायुसेना ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'पिच ब्लैक 2026' में हिस्सा लेने जा रही है। 20 जुलाई से 7 अगस्त तक चलने वाले इस अभ्यास में भारत अपने अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान, C-17 ग्लोबमास्टर-III और IL-78 एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग विमान के साथ भाग लेगा। इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना और संयुक्त अभियान की क्षमता को मजबूत करना है।
By : Admin User | Updated at : 19 Jul 2026, 05:47 pm (IST)
भारतीय वायुसेना सोमवार से ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'पिच ब्लैक 2026' में हिस्सा लेगी। यह अभ्यास 20 जुलाई से 7 अगस्त तक उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) बेस पर आयोजित किया जाएगा। इसे ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास माना जाता है।
राफेल समेत कई आधुनिक विमान होंगे शामिल
इस बार भारतीय वायुसेना अपने सबसे आधुनिक राफेल लड़ाकू विमान के साथ अभ्यास में हिस्सा ले रही है। इसके अलावा भारतीय दल में C-17 ग्लोबमास्टर-III रणनीतिक परिवहन विमान और IL-78 एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग विमान भी शामिल होंगे। ये विमान लंबी दूरी के अभियान, हवाई ईंधन भरने और रसद सहायता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगे।
45 साल के इतिहास का सबसे बड़ा संस्करण
'पिच ब्लैक 2026' इस सैन्य अभ्यास के 45 वर्षों के इतिहास के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जा रहा है। इसमें कई देशों की वायुसेनाएं और हजारों सैन्यकर्मी भाग लेंगे। अभ्यास के दौरान दिन और रात दोनों समय जटिल हवाई अभियानों का अभ्यास किया जाएगा, जिसमें संयुक्त ऑपरेशन, हवाई युद्ध रणनीति और समन्वय पर विशेष जोर रहेगा।
भारतीय वायुसेना के लिए क्यों है अहम?
भारतीय वायुसेना के लिए यह अभ्यास कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इससे लंबी दूरी तक सैन्य अभियान संचालित करने की क्षमता का परीक्षण होगा। साथ ही विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के साथ मिलकर काम करने का अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा रक्षा सहयोग
'पिच ब्लैक 2026' को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है। भारत पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र के देशों के साथ सैन्य साझेदारी और संयुक्त अभ्यासों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इस अभ्यास के जरिए भारतीय वायुसेना अपनी आधुनिक क्षमताओं का प्रदर्शन करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर रक्षा सहयोग को भी नई मजबूती देगी।
Published at : 19 Jul 2026, 05:46 pm (IST)