ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता से इनकार कर दिया है। IRNA के मुताबिक, वॉशिंगटन की अवास्तविक मांगें और सीजफायर उल्लंघन इसके पीछे की वजह हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ सकता है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : Rashtriya Samachar
मध्य-पूर्व में हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं। Iran ने United States के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले ने कूटनीतिक कोशिशों को झटका देते हुए क्षेत्र में नए टकराव की आशंका को बढ़ा दिया है।
ईरान की सरकारी एजेंसी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि तेहरान अब वॉशिंगटन की “अवास्तविक और बढ़ती मांगों” के आगे झुकने को तैयार नहीं है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार अपना रुख बदल रहा है और विरोधाभासी बयान दे रहा है, जिससे भरोसे का माहौल खत्म हो गया है।
ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियां, खासकर Strait of Hormuz में बढ़ती हलचल, सीजफायर का खुला उल्लंघन हैं। तेहरान का मानना है कि ऐसे माहौल में किसी भी शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं रह जाता।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम वार्ता होने वाली थी। लेकिन आखिरी वक्त पर ईरान के इस फैसले ने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया है।
इससे पहले Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसने प्रस्तावित डील को ठुकराया, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और अहम ढांचे को निशाना बना सकता है। इस बयान के बाद पहले ही तनाव चरम पर था, और अब ईरान के फैसले ने हालात को और भड़का दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ कूटनीतिक असहमति नहीं, बल्कि रणनीतिक टकराव का संकेत है। ईरान जहां अपनी शर्तों पर बातचीत चाहता है, वहीं अमेरिका दबाव की नीति पर कायम है।
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है। आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भी असर देखने को मिल सकता है।
Published at : 20 Apr 2026, 12:31 pm (IST)
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