राजधानी भोपाल में आयोजित डॉक्टरों की एक अहम बैठक में विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाइयों की घटती प्रभावशीलता पर गंभीर चिंता जताई। डॉक्टरों के अनुसार, मरीजों पर अब कई एंटीबायोटिक दवाइयाँ असर नहीं कर रही हैं और यह स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
दवाएं
Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)
भोपाल, 15 सितम्बर। विशेषज्ञों ने बताया कि बैक्टीरिया समय के साथ दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक बन गए हैं। पहले जो दवाइयाँ सरल संक्रमणों में कारगर थीं, वे अब बेअसर साबित हो रही हैं। पेनिसिलिन, एमोक्सीसिलिन और मेरोपेनम जैसी एंटीबायोटिक, जो संक्रमण रोकने में प्रमुख मानी जाती थीं, अब कई मामलों में मरीजों को राहत नहीं दे रही हैं।
AIIMS भोपाल द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में यह साफ हुआ कि जनवरी से जून 2025 के बीच ई.कोलाई पर सिप्रोफ्लोक्सासिन की असरदारी केवल 39 प्रतिशत रही, जबकि क्लेब्सिएला न्यूमोनिया* पर मेरोपेनम की प्रभावशीलता सिर्फ 52 प्रतिशत पाई गई। इन आँकड़ों ने चिकित्सकों को गंभीर चुनौती के प्रति आगाह किया है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि जिन दवाइयों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में लगभग भुला दिया गया था, जैसे सेफ्लोस्पोरिन और क्लोराम्फेनिकोल, वे अब दोबारा संक्रमण के इलाज में असर दिखा रही हैं। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि बैक्टीरिया की बदलती प्रकृति से लड़ने के लिए चिकित्सा विज्ञान में निरंतर शोध और नये उपायों की सख्त आवश्यकता है।
बैठक में डॉक्टरों ने मरीजों से अपील की कि वे बिना परीक्षण और चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग न करें। अनुचित और अंधाधुंध इस्तेमाल ही एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR) का मुख्य कारण बन रहा है।
इसी बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने भी AMR से निपटने के लिए राज्य स्तरीय योजना लागू करने की घोषणा की है। इस योजना में अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, दवाइयों की उपयोग-निगरानी और जनजागरूकता अभियान शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि एंटीबायोटिक का गलत प्रयोग रोका नहीं गया तो आने वाले वर्षों में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह पर ही लें। छोटे-से संक्रमण में तुरंत दवा का सेवन करना या बीच में दवा छोड़ देना मरीज के साथ-साथ पूरे समाज के लिए खतरा साबित हो सकता है।
Published at : 15 Sept 2025, 10:20 am (IST)
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