चार्जशीट के मुताबिक, गोपनीय अनुवाद, दोबारा अनुवाद और प्रूफरीडिंग की प्रक्रिया के दौरान प्रश्नों की जानकारी कथित रूप से बाहर पहुंचाई गई। जांच में बॉटनी और जूलॉजी से जुड़ी मनीषा गुरुनाथ मांधरे, केमिस्ट्री के विशेषज्ञ प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स से जुड़ी मनीषा संजय हवलदार की भूमिका का जिक्र किया गया है।
By : Admin User | Updated at : 07 Aug 2026, 01:45 pm (IST)
NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में परीक्षा से पहले प्रश्नों के कथित तौर पर बाहर पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क की शुरुआत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से कॉन्ट्रैक्ट पर जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों से हुई, जिन्हें प्रश्नपत्र से संबंधित गोपनीय कार्यों के लिए अधिकृत पहुंच मिली हुई थी।
चार्जशीट के मुताबिक, गोपनीय अनुवाद, दोबारा अनुवाद और प्रूफरीडिंग की प्रक्रिया के दौरान प्रश्नों की जानकारी कथित रूप से बाहर पहुंचाई गई। जांच में बॉटनी और जूलॉजी से जुड़ी मनीषा गुरुनाथ मांधरे, केमिस्ट्री के विशेषज्ञ प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स से जुड़ी मनीषा संजय हवलदार की भूमिका का जिक्र किया गया है।
CBI का आरोप है कि अप्रैल 2026 के दौरान पूरा प्रिंटेड प्रश्नपत्र बाहर निकालने के बजाय उसके सवाल, विकल्प और सही जवाब अलग-अलग माध्यमों से छात्रों तथा अन्य लोगों तक पहुंचाए गए। कुलकर्णी और मांधरे पर पुणे में चुनिंदा छात्रों के लिए गुप्त रिवीजन सेशन आयोजित करने का आरोप है। इन सेशन में कथित तौर पर सवाल और उनके विकल्प बोलकर बताए जाते थे, जिन्हें छात्र अपनी नोटबुक में लिखते थे।
फिजिक्स के प्रश्नों से जुड़े नेटवर्क में CBI ने मनीषा हवलदार और पुणे में फिजिक्स पढ़ाने वाले तेजस हर्षदकुमार शाह के बीच संपर्क का उल्लेख किया है। आरोप है कि सवालों के हाथ से लिखे नोट्स की तस्वीरें आगे लातूर स्थित एक करियर सेंटर से जुड़े व्यक्ति तक पहुंचाई गईं। जांच एजेंसी ने इससे जुड़े डिजिटल भुगतान के साक्ष्य मिलने का भी दावा किया है।
चार्जशीट में एक अन्य कड़ी लातूर से जुड़ी बताई गई है। CBI के अनुसार, कुछ चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुए सवाल याद कराने के लिए बुलाया गया था। एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच संपर्क और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।
CBI की जांच के मुताबिक, लीक हुए सवाल बाद में महाराष्ट्र से बाहर भी पहुंचे। आरोप है कि इन्हें PDF फाइल में तैयार कर टेलीग्राम के जरिए गुरुग्राम तक भेजा गया और वहां से यह सामग्री जयपुर पहुंची। चार्जशीट में इस PDF को कथित तौर पर 10 से 12 लाख रुपये में बेचे जाने का भी जिक्र है।
जांच में फोरेंसिक साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और हैंडराइटिंग जांच के जरिए छापेमारी में बरामद छात्रों की नोटबुक की जांच की गई। CBI के मुताबिक, इन नोट्स में लिखे सवाल 3 मई को आयोजित वास्तविक NEET-UG परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाते पाए गए।
जांच एजेंसी ने मामले में डिजिटल पेमेंट के रिकॉर्ड मिलने और एक संबंधित व्यक्ति के पास से पांच लाख रुपये नकद बरामद होने का भी दावा किया है। CBI अब इस कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका, पैसों के लेन-देन और प्रश्नों को अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने की पूरी कड़ी को चार्जशीट के जरिए अदालत के सामने लेकर आई है।
Published at : 07 Aug 2026, 01:45 pm (IST)