बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि घटना को 13 वर्ष बीत चुके हैं और इस दौरान आरोपी के खिलाफ किसी अन्य प्रकार के दुराचार या आपराधिक गतिविधि की कोई शिकायत सामने नहीं आई। उनका कहना था कि दोनों पक्ष अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तरुण तेजपाल को सज़ा सुनाई।
By : Admin User | Updated at : 06 Aug 2026, 05:42 pm (IST)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 के चर्चित रेप केस में वरिष्ठ पत्रकार और तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 10 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई है। यह मामला उनकी एक जूनियर सहयोगी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा है, जिसने देशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी।
सज़ा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों पर विचार किया गया। तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने अदालत में दलील दी कि यह आरोपी का पहला आपराधिक मामला है। उन्होंने बताया कि घटना वर्ष 2013 की है, जबकि अपील 2022 से लंबित है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तरुण तेजपाल जमानत की सभी शर्तों का पालन करते रहे हैं, उनका पासपोर्ट अधिकारियों के पास जमा है और उन्होंने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। इन आधारों पर अदालत से न्यूनतम सज़ा देने की अपील की गई।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि घटना को 13 वर्ष बीत चुके हैं और इस दौरान आरोपी के खिलाफ किसी अन्य प्रकार के दुराचार या आपराधिक गतिविधि की कोई शिकायत सामने नहीं आई। उनका कहना था कि दोनों पक्ष अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तरुण तेजपाल को 10 वर्ष की कठोर कैद की सज़ा सुनाई।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में तहलका पत्रिका की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन शोषण और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। यह मामला देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में से एक रहा, जिस पर लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही। अब बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले के साथ इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव सामने आया है।
Published at : 06 Aug 2026, 05:42 pm (IST)