इस समझौते को ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ नाम दिया गया है। मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई बैठक के दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
By : Admin User | Updated at : 07 Aug 2026, 06:31 pm (IST)
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने रक्षा सहयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। तीनों देशों ने शुक्रवार को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
इस समझौते को ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ नाम दिया गया है। मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई बैठक के दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का प्रमुख उद्देश्य तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाना है। इसके तहत सैन्य सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय बढ़ाने की बात कही गई है।
इस रक्षा समझौते का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा है। अगर पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्किये में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा। यह व्यवस्था सामूहिक रक्षा की अवधारणा पर आधारित है।
तीनों देशों की ओर से समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया गया है। इसका उद्देश्य किसी विशेष देश के खिलाफ गठबंधन तैयार करना नहीं, बल्कि सदस्य देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना बताया गया है।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बढ़ता सैन्य समन्वय भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीनों देशों के बीच पहले से ही रक्षा क्षेत्र में सहयोग रहा है। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में भी एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता किया था। नए त्रिपक्षीय समझौते के बाद अब तुर्किये भी इस सामूहिक रक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन गया है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग जारी है, जबकि तुर्किये ने पिछले कुछ वर्षों में अपने घरेलू रक्षा उद्योग और सैन्य तकनीक का तेजी से विस्तार किया है। नए समझौते से इन क्षमताओं के बीच सहयोग और बढ़ने की संभावना है।
मक्का में हुई बैठक के दौरान तीनों देशों के नेताओं ने रक्षा के अलावा आपसी संबंधों और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। संयुक्त बयान में समझौते को क्षेत्र और उससे बाहर शांति, सुरक्षा तथा स्थिरता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया गया है।
इस समझौते को लेकर ‘इस्लामिक NATO’ जैसी तुलना भी सामने आ सकती है, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे NATO जैसा संगठन घोषित नहीं किया गया है। फिलहाल यह पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच एक त्रिपक्षीय सामूहिक रक्षा समझौता है।
Published at : 07 Aug 2026, 06:31 pm (IST)