राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन नकली पाया गया। राज्य में 11 दवाओं के सैंपल भी फेल हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
जयपुर: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही दवाइयों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद चार महिलाओं की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि महिलाओं को लगाया गया ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन नकली था। ड्रग कंट्रोल विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इंजेक्शन में वह जरूरी सक्रिय तत्व ही पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं था, जो प्रसव के बाद होने वाली अत्यधिक ब्लीडिंग रोकने के लिए आवश्यक होता है।
पूरे राजस्थान में दवा पर लगाई गई रोक
मामले के सामने आने के बाद राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग ने तत्काल प्रभाव से इस इंजेक्शन की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स से संबंधित बैच का स्टॉक हटाने के आदेश जारी किए गए हैं। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि अमृतसर स्थित जैक्सन लेबोरेट्रीज़ द्वारा निर्मित TOCIN (ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन) का सैंपल लैब जांच में फेल पाया गया। इसके बाद कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल से इस बैच का पूरा स्टॉक जब्त कर लिया गया है।

12 हजार से ज्यादा महिलाओं को लगाया गया इंजेक्शन
जानकारी के अनुसार, कोटा मेडिकल कॉलेज में इसी कंपनी के 1 एमएल वाले इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया था। पिछले चार महीनों में करीब 12,500 प्रसूताओं को यह इंजेक्शन लगाया जा चुका है। अस्पताल में करीब 15 हजार इंजेक्शन सप्लाई किए गए थे। जिस बैच का नमूना जांच में फेल हुआ है, उसकी बैच संख्या I-7881 बताई गई है।
क्या होता है ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन?
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के दौरान दिया जाता है। इसका उपयोग:
• प्रसव पीड़ा शुरू कराने
• बच्चे के जन्म के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने
• गर्भाशय को सामान्य स्थिति में लाने
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंजेक्शन में सक्रिय तत्व पर्याप्त मात्रा में न हो, तो प्रसूता की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
अस्पताल प्रशासन ने जांच रिपोर्ट का इंतजार बताया
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल महिलाओं की मौत को सीधे नकली इंजेक्शन से जोड़ने से इनकार किया है। अस्पताल का कहना है कि विशेषज्ञों की कमेटी पूरे मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत सभी मेडिकल तथ्यों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
11 दवाओं के सैंपल भी फेल
इस घटना ने राजस्थान में दवा गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले 10 दिनों में राज्य में बिक रही 11 दवाओं के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
• बुखार की दवाएं
• एंटीबायोटिक्स
• एलर्जी की दवाएं
• पेट संक्रमण की दवाएं
• दर्द निवारक इंजेक्शन
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ये दवाइयां राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की विभिन्न कंपनियों में बनाई जा रही थीं।

विभाग करेगा सख्त कार्रवाई
ड्रग कंट्रोल विभाग अब संबंधित कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। साथ ही कंपनी द्वारा बनाए जा रहे अन्य बैच और दूसरी दवाओं के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाओं की नियमित और सख्त जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
Published at : 26 May 2026, 07:58 am (IST)
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