सुप्रीम कोर्ट ने बंदरों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए 100 प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती हेतु टेंडर जारी किया है। ये कर्मचारी कोर्ट परिसर और जजों के बंगलों में तैनात होंगे।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
Supreme Court of India ने अपने परिसर और जजों के रिहायशी बंगलों में बढ़ती बंदरों की समस्या को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने बंदरों को भगाने और नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती हेतु एक ऑनलाइन टेंडर जारी किया है।
टेंडर के तहत करीब 100 प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग की गई है, जिनका मुख्य काम कोर्ट परिसर, गेस्ट हाउस और जजों के आवासीय इलाकों से बंदरों को सुरक्षित तरीके से दूर रखना होगा। यह टेंडर गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए जारी किया गया है, जिससे इच्छुक एजेंसियां ऑनलाइन बोली लगा सकें।
कोर्ट के नोटिस के मुताबिक, इन कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित 35 से 40 जजों के रिहायशी बंगलों में तैनात किया जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट दो साल की अवधि के लिए प्रस्तावित है, हालांकि जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई या घटाई भी जा सकती है।
इस पहल का मकसद न सिर्फ बंदरों की समस्या को कम करना है, बल्कि जजों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। प्रशिक्षित कर्मचारी ऐसे तरीके अपनाएंगे, जिनसे बंदरों को कोई नुकसान न पहुंचे और उन्हें मानवीय तरीके से दूर रखा जा सके।
टेंडर में शामिल शर्तों के अनुसार, भाग लेने वाली एजेंसियों के पास कम से कम 3 साल का अनुभव होना चाहिए। साथ ही, उनका औसत वार्षिक टर्नओवर 50 लाख रुपये से अधिक होना जरूरी है और उनके पास GST, PAN व EPF/ESI जैसे सभी जरूरी पंजीकरण होने चाहिए।
कर्मचारियों की ड्यूटी दो शिफ्ट में होगी—सुबह 6:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से रात 10:30 बजे तक। उनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि बंदरों से किसी तरह का खतरा न पैदा हो और कोर्ट परिसर में सामान्य कामकाज प्रभावित न हो।
दिल्ली में बंदरों की समस्या पहले भी कई संस्थानों के लिए चुनौती बन चुकी है। हाल ही में दिल्ली विधानसभा में भी ‘लंगूर विशेषज्ञों’ की मदद ली गई थी, ताकि बंदरों को नियंत्रित किया जा सके।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एक व्यावहारिक और जरूरी पहल माना जा रहा है, जिससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि कोर्ट परिसर में कामकाज भी सुचारू रूप से चल सकेगा।
Published at : 03 Apr 2026, 11:33 am (IST)
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