चीन में आयोजित एक साप्ताहिक "विवाह बाज़ार" में 38 वर्षीय महिला भावुक होकर रो पड़ी। महिला ने बताया कि वह सालाना करीब 5 लाख युआन कमाती है और आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र है, लेकिन 30 वर्ष की उम्र पार करने के कारण उसे उपयुक्त जीवनसाथी नहीं मिल रहा। यह घटना चीन में महिलाओं की शादी और उम्र को लेकर मौजूद सामाजिक सोच पर चर्चा का विषय बन गई है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
चीन में एक 38 वर्षीय महिला की भावुक कहानी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह महिला उस समय फूट-फूटकर रोने लगी जब वह एक साप्ताहिक "विवाह बाज़ार" में पहुंची, जहां माता-पिता अपने अविवाहित बच्चों के लिए संभावित जीवनसाथी की तलाश करते हैं।
महिला ने बताया कि वह सालाना लगभग 5 लाख युआन की आय अर्जित करती है और अपने करियर में सफल है। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद उसे विवाह के लिए उपयुक्त साथी ढूंढने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
'उम्र ही सबसे बड़ी समस्या बन गई है'

महिला के अनुसार, उसकी सबसे बड़ी चुनौती उसकी उम्र है। उसने कहा कि 30 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिलाओं को लेकर समाज में अब भी कई पूर्वाग्रह मौजूद हैं। कई संभावित रिश्ते केवल उम्र के आधार पर आगे नहीं बढ़ पाते, जबकि उसकी शिक्षा, आय और जीवनशैली किसी भी दृष्टि से कमजोर नहीं हैं।
भावुक होते हुए उसने कहा कि उसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा करियर बनाने में लगाया, लेकिन अब जब वह विवाह करना चाहती है, तो समाज उसे अलग नजर से देखता है।
चीन में विवाह को लेकर बढ़ती सामाजिक चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में विवाह की औसत आयु लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में युवा महिलाएं शिक्षा और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसके कारण विवाह देर से हो रहा है। हालांकि, समाज के कुछ वर्गों में अब भी यह धारणा बनी हुई है कि महिलाओं को कम उम्र में शादी कर लेनी चाहिए।
इसी सोच के कारण कई शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिलाओं को विवाह के मामले में सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है। चीन में ऐसी महिलाओं के लिए कभी-कभी "शेंग नू" (Leftover Women) जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया जाता है, जिसकी आलोचना होती रही है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
महिला का वीडियो और उसकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने महिला के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की योग्यता और व्यक्तित्व का आकलन केवल उम्र के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आधुनिक समाज में विवाह को लेकर पारंपरिक मान्यताओं में बदलाव की जरूरत है, ताकि महिलाओं और पुरुषों दोनों को अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिल सके।
बदलते दौर में पुरानी सोच पर सवाल
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि क्या आज भी किसी महिला की वैवाहिक संभावनाओं का आकलन उसकी उम्र के आधार पर किया जाना चाहिए। आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा और व्यक्तिगत उपलब्धियों के बावजूद यदि उम्र विवाह में बाधा बन रही है, तो यह समाज की सोच पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
38 वर्षीय महिला की यह कहानी केवल उसकी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की भावना को भी दर्शाती है जो करियर और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाते हुए सामाजिक अपेक्षाओं का सामना कर रही हैं।
Published at : 20 Jun 2026, 12:21 pm (IST)
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