गुजरात में चांदीपुरा वायरस को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया है। जानिए इसके लक्षण, कैसे फैलता है और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
By : Admin User | Updated at : 13 Jul 2026, 05:05 pm (IST)
गुजरात में चांदीपुरा वायरस को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यह वायरस मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और कई मामलों में तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए समय रहते इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियूष भुवा के अनुसार, चांदीपुरा वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (Sandfly) नामक छोटी मक्खी के काटने से फैलता है। यह वायरस बच्चों के तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर असर डाल सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इस वायरस के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर बच्चे को दौरे पड़ सकते हैं, बेहोशी आ सकती है या लकवा जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर बिना देरी किए बच्चे को नजदीकी अस्पताल या बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस बीमारी से बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाने चाहिए ताकि सैंडफ्लाई के काटने का खतरा कम हो। इसके साथ ही मच्छर और मक्खियों से बचाव के लिए रिपेलेंट क्रीम या अन्य सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। गंदगी, नमी और पानी जमा होने वाली जगहों पर कीट तेजी से पनपते हैं, इसलिए ऐसे स्थानों को साफ रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चे में तेज बुखार, बार-बार उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू इलाज पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
में चांदीपुरा वायरस को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यह वायरस मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और कई मामलों में तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए समय रहते इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियूष भुवा के अनुसार, चांदीपुरा वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (Sandfly) नामक छोटी मक्खी के काटने से फैलता है। यह वायरस बच्चों के तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर असर डाल सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इस वायरस के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर बच्चे को दौरे पड़ सकते हैं, बेहोशी आ सकती है या लकवा जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर बिना देरी किए बच्चे को नजदीकी अस्पताल या बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस बीमारी से बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाने चाहिए ताकि सैंडफ्लाई के काटने का खतरा कम हो। इसके साथ ही मच्छर और मक्खियों से बचाव के लिए रिपेलेंट क्रीम या अन्य सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। गंदगी, नमी और पानी जमा होने वाली जगहों पर कीट तेजी से पनपते हैं, इसलिए ऐसे स्थानों को साफ रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चे में तेज बुखार, बार-बार उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू इलाज पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Published at : 13 Jul 2026, 05:05 pm (IST)