कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को बेटियों को सरकारी नौकरी दिलाने और OBC आरक्षण के कथित दुरुपयोग के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। जानिए पूरा मामला।
By : Admin User | Updated at : 13 Jul 2026, 05:19 pm (IST)
कर्नाटक में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को अपनी दो बेटियों को कथित तौर पर सरकारी नौकरी दिलाने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने यह कार्रवाई की है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट से कराने की सिफारिश भी राष्ट्रपति को भेजी गई है।
आरोप है कि शिवशंकरप्पा साहूकार ने औद्योगिक विस्तार अधिकारी (Industrial Extension Officer) के पद पर अपनी दोनों बेटियों का चयन कराने के लिए अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल किया। नियमों के मुताबिक यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में किसी अधिकारी का करीबी रिश्तेदार उम्मीदवार हो, तो संबंधित अधिकारी को उस पूरी चयन प्रक्रिया से खुद को अलग करना होता है। लेकिन शिकायत के अनुसार साहूकार ने न तो खुद को चयन प्रक्रिया से अलग किया और न ही आयोग को यह जानकारी दी कि उनकी बेटियां भी उसी भर्ती में शामिल हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल आय प्रमाण पत्र को लेकर भी उठ रहा है। आरोप है कि साहूकार की बेटियों ने परिवार की वार्षिक आय केवल 40 हजार रुपये दिखाकर OBC नॉन-क्रीमी लेयर का लाभ लिया। जबकि एक लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के परिवार की आय इतनी कम होना सवालों के घेरे में है। इतना ही नहीं, वर्ष 2002 के सरकारी नियमों के अनुसार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के बच्चों को पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
जब इस पूरे मामले की शिकायत राजभवन पहुंची तो राज्यपाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शिवशंकरप्पा साहूकार को सस्पेंड कर दिया। जांच पूरी होने तक उन्हें पद से दूर रखा जाएगा ताकि जांच प्रभावित न हो। फिलहाल आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्यपाल ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। यदि ऐसा होता है तो पूरे मामले की न्यायिक जांच होगी और आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी।
यह पहली बार नहीं है जब सरकारी भर्ती में परिवारवाद और अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। वर्ष 2024 में राजस्थान की SI भर्ती परीक्षा में भी तत्कालीन RPSC सदस्य रामूराम राईका पर अपने बेटे और बेटी को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप लगा था। बाद में जांच में मामला सही पाए जाने पर उन्हें और उनके दोनों बच्चों को गिरफ्तार किया गया था।
कर्नाटक का यह मामला एक बार फिर सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट की संभावित कार्रवाई पर है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी बड़ा संदेश देगा।
Published at : 13 Jul 2026, 05:17 pm (IST)