बादल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है। पार्टी ने इसी आधार पर देश में महिला आरक्षण को लागू करने का समर्थन किया है।
By : Admin User | Updated at : 08 Aug 2026, 07:01 pm (IST)
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नए सियासी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के एक दिन बाद पार्टी ने महिला आरक्षण और निष्पक्ष परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन किया है। इन घटनाक्रमों के बाद SAD और BJP के एक बार फिर साथ आने की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
शनिवार को चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अकाली दल महिलाओं की समानता और अधिकारों का समर्थन करता है और इसकी प्रेरणा सिख गुरुओं की शिक्षाओं से मिलती है।
बादल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है। पार्टी ने इसी आधार पर देश में महिला आरक्षण को लागू करने का समर्थन किया है।
परिसीमन पर भी SAD ने रखा अपना पक्ष
महिला आरक्षण के साथ अकाली दल ने परिसीमन के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। पार्टी ने ऐसी परिसीमन प्रक्रिया की मांग की है जिसमें सभी राज्यों को समान और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व मिले।
सुखबीर बादल के मुताबिक, पार्टी ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी करने की मांग की है। SAD का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी राज्य के प्रतिनिधित्व के साथ असमानता न हो।
संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर शिरोमणि अकाली दल के समर्थन का स्वागत किया है।
मोदी-बादल मुलाकात के बाद गठबंधन की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग ने पंजाब की राजनीति में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। SAD का यह रुख सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के ठीक एक दिन बाद सामने आया है।
इसी कारण राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या कभी लंबे समय तक सहयोगी रहे BJP और SAD आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले फिर एक साथ आ सकते हैं। हालांकि दोनों पार्टियों की तरफ से फिलहाल किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
2020 में अलग हुए थे पुराने सहयोगी
BJP और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे थे। लेकिन केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर पैदा हुए मतभेदों के बाद SAD ने 2020 में BJP के नेतृत्व वाले NDA से अलग होने का फैसला किया था।
बाद में केंद्र सरकार ने 2021 में तीनों कृषि कानून वापस ले लिए, लेकिन इसके बावजूद दोनों पार्टियों के बीच पुराना गठबंधन बहाल नहीं हुआ। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में BJP और SAD ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और आम आदमी पार्टी ने राज्य में बड़ी जीत दर्ज की।
SAD नेता ने गठबंधन को बताया जरूरत
दोनों पार्टियों के संभावित गठबंधन को लेकर SAD के वरिष्ठ नेता सिकंदर सिंह मलूका का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात में SAD और BJP के गठबंधन की जरूरत है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, पार्टी का आधिकारिक फैसला नहीं।
उनका कहना है कि अगर भविष्य में गठबंधन की बात आगे बढ़ती है तो उसकी शर्तों और राजनीतिक समीकरणों पर पार्टी के भीतर विस्तार से विचार करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
दूसरी ओर BJP और SAD के अन्य नेताओं ने भी फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात, उसके तुरंत बाद महिला आरक्षण एवं परिसीमन पर SAD का समर्थन और गठबंधन को लेकर पार्टी नेताओं के बयान ने पंजाब की राजनीति में नई अटकलों को जरूर जन्म दे दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या ये घटनाक्रम केवल राजनीतिक मुद्दों पर आपसी सहमति तक ही सीमित रहता है।
Published at : 08 Aug 2026, 07:01 pm (IST)