यह टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई। संगठन ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाले अपने आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी।
By : Admin User | Updated at : 08 Aug 2026, 11:10 am (IST)
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल बनाए रखने को लेकर अहम सवाल उठाया है। शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि शहर के बीचों-बीच होने वाले प्रदर्शनों के कारण आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र से यह भी पूछा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
यह टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई। संगठन ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाले अपने आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने अदालत को बताया कि संगठन ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन पुलिस ने अभी तक न तो उसे मंजूरी दी और न ही खारिज किया। उन्होंने अदालत को बताया कि प्रस्तावित प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोगों के शामिल होने की बात कही गई है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने राजधानी के बीच प्रदर्शन आयोजित किए जाने पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से इनकार नहीं किया जा रहा, लेकिन इससे शहर के दूसरे लोगों के अधिकार और सामान्य गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने ट्रैफिक, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर का भी जिक्र किया। कोर्ट की टिप्पणी थी कि विरोध-प्रदर्शन के कारण पूरे शहर को ‘बंधक’ जैसी स्थिति में नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल बनाए जाने से जुड़ा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए यह भी कहा कि स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने के कारण इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
सरकार की ओर से यह चिंता भी जताई गई कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या अचानक बढ़ सकती है, जिससे सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुद्दा प्रदर्शन के लोकतांत्रिक या अलोकतांत्रिक होने का नहीं, बल्कि शहर के सामान्य कामकाज और दूसरे नागरिकों को होने वाली परेशानी का है।
सुनवाई के अंत में हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस को ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की प्रदर्शन की अनुमति वाली अर्जी पर 8 अगस्त तक फैसला लेने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर व्यवस्था में कोई बदलाव करने का अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। कोर्ट की टिप्पणियों ने हालांकि राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
Published at : 08 Aug 2026, 11:02 am (IST)