केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मिथिला मखाना की इस खेप के ऑस्ट्रेलिया रवाना होने की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे भारतीय कृषि निर्यात के लिए अहम उपलब्धि बताया।
By : Admin User | Updated at : 08 Aug 2026, 11:57 am (IST)
बिहार के प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना की खेप समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। इस निर्यात को बिहार के कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस खेप की सबसे खास बात यह रही कि निर्यात के लिए मखाना सीधे दरभंगा जिले के किसानों से खरीदा गया। इससे किसानों को उनके उत्पाद का बाजार मूल्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक लाभ मिला। सीधे खरीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव की इस व्यवस्था से किसानों को अपने उत्पाद के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मिथिला मखाना की इस खेप के ऑस्ट्रेलिया रवाना होने की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे भारतीय कृषि निर्यात के लिए अहम उपलब्धि बताया। इस निर्यात प्रक्रिया में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) का सहयोग रहा।
मिथिला मखाना को पहले ही भौगोलिक संकेत यानी GI Tag मिल चुका है, जिससे इसकी क्षेत्रीय पहचान और विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता मिली है। अब समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया तक इसकी पहुंच बिहार के इस पारंपरिक कृषि उत्पाद के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोल सकती है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि किसानों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने की व्यवस्था मजबूत होने पर उन्हें बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे बिहार के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
मिथिला मखाना की ऑस्ट्रेलिया भेजी गई यह पहली समुद्री खेप न केवल बिहार के कृषि निर्यात के लिए अहम है, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में अगर अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ती है, तो इससे मखाना उत्पादक किसानों की आय और क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
Published at : 08 Aug 2026, 11:57 am (IST)