जांच एजेंसियों को आशंका है कि मामला केवल एक अधिकारी से जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं हो सकता। इसके पीछे एक बड़े जासूसी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
By : Admin User | Updated at : 08 Aug 2026, 02:18 pm (IST)
भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर से जुड़ा कथित हनी ट्रैप और जासूसी का गंभीर मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने अधिकारी को संवेदनशील रक्षा जानकारी कथित तौर पर बाहरी लोगों तक पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इस मामले में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है और अधिकारी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि मामला केवल एक अधिकारी से जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं हो सकता। इसके पीछे एक बड़े जासूसी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों और सैन्य गतिविधियों से संबंधित संवेदनशील जानकारी हासिल करना हो सकता था।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, विंग कमांडर की सोशल मीडिया के जरिए एक महिला से बातचीत शुरू हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और वीडियो कॉल पर भी बातचीत होने लगी। पुलिस को संदेह है कि महिला ने पहले अधिकारी का भरोसा हासिल किया और बाद में उनसे सैन्य गतिविधियों से संबंधित जानकारी मांगनी शुरू की।
आरोप है कि अधिकारी से सैन्य यूनिट्स की आवाजाही, उनकी तैनाती और अन्य संवेदनशील गतिविधियों से संबंधित फोटो, वीडियो तथा जानकारी मांगी गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वास्तव में कौन-कौन सी जानकारी साझा की गई और वह कितनी संवेदनशील थी।
पुलिस को शक है कि सोशल मीडिया पर अधिकारी के संपर्क में आई महिला के पीछे पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स हो सकते हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला की वास्तविक पहचान क्या थी, वह किन लोगों के संपर्क में थी और अधिकारी से हासिल की गई जानकारी आगे कहां भेजी गई।
मामले में एक संदिग्ध मोबाइल ऐप का एंगल भी सामने आया है। जांच के मुताबिक, महिला ने कथित तौर पर विंग कमांडर से उनके एक सहयोगी के मोबाइल फोन में एक खास ऐप इंस्टॉल कराने के लिए कहा था।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह ऐप स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था। ऐसे ऐप के जरिए किसी डिवाइस के डेटा, लोकेशन या दूसरी डिजिटल जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश संभव हो सकती है। हालांकि संबंधित ऐप की वास्तविक क्षमता और उसके इस्तेमाल के उद्देश्य की जांच अभी जारी है।
इस एंगल के सामने आने के बाद एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि कथित नेटवर्क का उद्देश्य सिर्फ विंग कमांडर से जानकारी हासिल करना था या दूसरे रक्षा अधिकारियों और उनके डिजिटल उपकरणों तक पहुंच बनाने की भी कोशिश की जा रही थी।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना की इंटेलिजेंस विंग से मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की थी। विंग कमांडर को 31 मई 2026 की रात गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती पुलिस हिरासत में पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बताए जा रहे हैं।
जांच का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित है। अधिकारी और महिला के बीच हुई बातचीत, इस्तेमाल किए गए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डिजिटल फाइलों के आदान-प्रदान और संभावित विदेशी संपर्कों की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
इसके साथ ही जांच एजेंसियां कथित विदेशी हैंडलर्स की पहचान करने और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। यह भी जांचा जा रहा है कि कथित तौर पर बाहर गई जानकारी का इस्तेमाल किसी भारत विरोधी गतिविधि या राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाना था या नहीं।
फिलहाल जांच जारी है और पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। एजेंसियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि कथित तौर पर कितनी संवेदनशील रक्षा जानकारी बाहर गई और क्या इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी तरह का खतरा पैदा हुआ।
Published at : 08 Aug 2026, 02:18 pm (IST)
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