गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2017, 2021 और 2023 में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के तथाकथित मानकीकृत चीनी नाम जारी कर चुका है।
By : Admin User | Updated at : 08 Aug 2026, 11:22 am (IST)
चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच भारत ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है। भारत सरकार ने राज्य के 27 स्थानों और अहम भौगोलिक क्षेत्रों के आधिकारिक नाम भारतीय मानचित्र में दर्ज कर दिए हैं। भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने इन स्थानों को मानचित्र में शामिल करते हुए उनकी पहचान और भौगोलिक स्थिति को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया है।
भारत लंबे समय से चीन के उस कदम का विरोध करता आया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न इलाकों को नए नाम देकर वहां अपना दावा जताने की कोशिश की जाती है। भारत ने साफ कहा है कि किसी स्थान का नाम बदल देने से उसकी वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और आगे भी रहेगा।
भारतीय मानचित्र में शामिल किए गए 27 स्थानों में LAC के नजदीक स्थित लोंग जू भी शामिल है। इसके अलावा अपर सुबनसिरी जिले के माजा और बिसा गांवों के साथ ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला जैसे महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रों को भी आधिकारिक पहचान दी गई है। थाग ला दर्रे को भी इस सूची में जगह मिली है, जो भारत-चीन सीमा विवाद और 1962 के युद्ध के संदर्भ में बेहद अहम माना जाता है।
पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के कई रणनीतिक इलाकों को भी आधिकारिक मानचित्र में दर्ज किया गया है। इनमें चांगलांग जिले का जयरामपुर शामिल है, जो सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और रसद की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन, छोटा कुंडुन, धनबाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर, रामनगर-जसवंतगढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांव भी सूची का हिस्सा हैं।
वहीं, शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर जैसे स्थानों को भी भारतीय मानचित्र में शामिल किया गया है। भारत का कहना है कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों को अलग नाम देने की कवायद महज एकतरफा दावा है और इससे जमीनी हकीकत पर कोई असर नहीं पड़ता।
बता दें कि चीन पहले भी अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए अपने तथाकथित मानकीकृत नाम जारी कर चुका है। 2017 में छह, 2021 में 15 और 2023 में 11 स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की गई थी। चीन अरुणाचल प्रदेश को 'जांगनान' के नाम से संबोधित करता है, लेकिन भारत हर बार उसके दावों को खारिज करता रहा है। भारत का रुख स्पष्ट है कि नाम बदलने की ऐसी कोशिशों से क्षेत्र की संप्रभुता या वास्तविक स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
Published at : 08 Aug 2026, 11:10 am (IST)