सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी में बदलाव करते हुए अफसरों की मनमानी पर रोक लगाई और गोस्वामी समाज के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को मंजूरी दी। यूपी सरकार को श्रद्धालु सुविधाओं में सुधार के निर्देश दिए गए।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
मथुरा के वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब मंदिर की हाई पावर कमेटी में गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों का चयन प्रशासनिक अधिकारियों की इच्छा से नहीं होगा, बल्कि यह चयन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आदेश जारी करते हुए कहा कि राजभोग और शयन भोग सेवाधिकारियों में से चुने हुए प्रतिनिधियों को ही कमेटी में शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने शयन भोग सेवायत परंपरा से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी तथा राजभोग सेवायत परंपरा से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी को समिति का सदस्य नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इन प्रतिनिधियों को मंदिर की सेवा परंपरा और प्रबंधन से जुड़े मामलों में अपनी राय रखने का अधिकार होगा, जिन पर समिति द्वारा गंभीरता से विचार किया जाएगा।
यह मामला तब सामने आया था जब पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी गठित की गई थी। इसमें मथुरा प्रशासन के अधिकारी और गोस्वामी समाज के चार प्रतिनिधि शामिल थे। लेकिन आरोप लगे कि प्रतिनिधियों का चयन पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया, जिसके बाद विवाद बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी निर्देश दिया है कि वृंदावन और बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने सड़कों के चौड़ीकरण, पेयजल व्यवस्था, रेस्ट रूम, वेटिंग एरिया, अस्पताल, आपातकालीन निकास और बुजुर्गों के लिए बैटरी चालित वाहनों जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए जा सकें।
साथ ही कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वह गोस्वामी समाज और स्थानीय निवासियों के सुझाव लेकर एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करे और उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Published at : 27 May 2026, 07:30 am (IST)
Tags : Breaking News / NEWS UPDATE / VIRAL / #india news / #nationalnews / #court, Supreme court / #news today / #SupremeCourt #BankeBihariTemple #Vrindavan #MathuraNews #TempleManagement #IndiaNews #CourtOrder #ReligiousNews